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Haryana VidhanSabha : हरियाणा विधानसभा में पंजाब का विरोध, SYL और चंडीगढ़ पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित

By इंडिया वॉइस 

Updated Date

चंडीगढ़, 05 अप्रैल। हरियाणा सरकार ने ऐलान कर दिया है कि सतलुज यमुना लिंक (SYL) नहर के मुद्दे पर पंजाब के साथ कोई बैठक नहीं की जाएगी। इसके लिए केंद्र पर दबाव बनाया जाएगा कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करवाए। प्रदेश सरकार की ओर से उठाए जाने वाले हर कदम में विपक्ष ने भी सहयोग करने का ऐलान किया है। इसके लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकीलों को भी खड़ा करेगी।

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अब समय आ गया है फैसले का- विपक्ष

विधानसभा में इनेलो विधायक अभय चौटाला और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अब समय आ गया जब सरकार को गंभीरता के साथ ठोस कदम उठाने होंगे। विपक्ष के कई विधायकों ने सरकार पर इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप भी लगाया।

सदन में SYL के संबंध में रिपोर्ट पेश

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को सदन में SYL के संबंध में रिपोर्ट पेश की, जिसके बाद सभी दलों ने ये फैसला लिया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि एक नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के हक में आने के बाद पंजाब ने इस फैसले पर रिव्यू पिटीशन दायर की थी। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को निर्देश दिए किए वो आपस में बातचीत के जरिए से इस विवाद का हल करें और केंद्र सरकार इसमें मध्यस्थता करेगी।

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अब हरियाणा ने किया आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला

सीएम मनोहर लाल ने बताया कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल के दौरान दो बार दोनों राज्यों में गृह सचिव और अधिकारियों की बैठक हुई। इसके बाद केंद्रीय जन शक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत द्वारा मध्यस्थता किए जाने के बाद उन्होंने खुद अमरिंदर सिंह के साथ बैठक की थी। इस बैठक में पंजाब ने दो सप्ताह का समय मांगा था। तय समय सीमा के बाद केंद्र ने जब बैठक बुलाई तो पंजाब का कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। पंजाब कई बार इस तरह टालमटोल कर चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के अधिकारियों को ये पता है कि इस मामले में हरियाणा का पक्ष मजबूत है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के पक्ष में आ चुका है, जिसे लागू करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब हरियाणा इस मामले में पंजाब के साथ कोई बात नहीं करेगा ना ही किसी तरह की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूरे घटनाक्रम से वाकिफ है। इसलिए अब हरियाणा ने आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत जल्द प्रधानमंत्री और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को पत्र लिखा जाएगा। यही नहीं सरकार को अगर जरूरत पड़ी तो वकीलों का एक पैनल बनाकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूती के साथ केस की पैरवी करवाकर जल्द से जल्द SYL का पानी लिया जाएगा।

सदन में 25 विधायकों ने अपना पक्ष रखा

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के इस प्रस्ताव पर विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, गृहमंत्री अनिल विज, जेजेपी विधायक ईश्वर सिंह, इनेलो विधायक अभय चौटाला, कांग्रेस विधायक किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई, शमशेर गोगी, बीबी बत्तरा, निर्दलीय कोटे से मंत्री रणजीत सिंह, बलराज कुंडू समेत विभिन्न दलों के कुल 25 विधायकों ने अपना पक्ष रखा। करीब 3 घंटे 12 मिनट चली सदन की कार्यवाही के दौरान हरियाणा ने पंजाब की निंदा करते हुए SYL का पानी देने, चंडीगढ़ पर हरियाणा का दावा बरकरार रखने, हिंदी भाषी क्षेत्र देने के संबंध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया गया है।

पंजाब सदन में चंडीगढ़ पंजाब को सौंपने का प्रस्ताव पारित

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बतादें कि केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ में सेंटर सर्विस रूल लागू किए जाने के विरोध में पंजाब सरकार ने एक अप्रैल को विधानसभा सत्र बुलाकर चंडीगढ़ पंजाब को सौंपने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके विरोध में मंगलवार को हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया। इस सत्र में चंडीगढ़ की मांग तो नहीं की गई, लेकिन एक कदम आगे बढ़ाते हुए SYL के पानी की मांग कर डाली। हरियाणा सरकार ने कहा कि हिंदी भाषी गांवों को पंजाब से हरियाणा को देने का काम भी पूरा नहीं हो पाया है।

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