Parliament : संसद का मानसून सत्र हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच खत्म हुआ। सत्र के लिए लोकसभा के आधिकारिक कैलेंडर में कुल 19 बैठकें रखी गई थीं। पूरे सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर लगातार रार देखने को मिली। विपक्ष ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और कथित पुलिस कार्रवाई सहित कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा और गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग की।
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अमित शाह ने कहा था कि वह जवाब देने के लिए तैयार हैं। इस बीच सरकार ने अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाते हुए कुल 19 विधेयक पारित कराए। इनमें एंटी-पेपर लीक, ‘केरलम’ नाम परिवर्तन, NCDC, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, टैक्सेशन, बैंकर्स बुक्स और MSME भुगतान व्यवस्था से जुड़े विधेयक शामिल रहे। इनमें सात विधेयक महज 36 मिनट में बिना चर्चा के पारित होने की बात सामने आई, वहीं FCRA संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेज दिया गया। ऐसे में सत्र के अंत तक सवाल यही रहा कि क्या NDA और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव खत्म होगा या आने वाले सत्र में भी यह रार जारी रहेगी।
हंगामे के बीच खत्म हुआ मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी सांसदों ने मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। इसके बाद सदन में वंदे मातरम् हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद रहे। गीत समाप्त होते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
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सरकार ने पास कराए 19 विधेयक
हंगामे और विरोध के बावजूद सरकार ने अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाया। संसदडॉटइन की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून सत्र में सरकार ने कुल 19 विधेयक पास कराए। लोकसभा में 11 विधेयक पारित हुए, जबकि राज्यसभा से भी कई प्रमुख विधेयकों को मंजूरी मिली। इन विधेयकों में आर्थिक, प्रशासनिक, सहकारी क्षेत्र, टैक्स और छोटे कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल रहे।
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सात बिल सिर्फ 36 मिनट में पास
सत्र के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उन सात विधेयकों की रही, जिन्हें महज 36 मिनट में बिना चर्चा के पारित किए जाने की बात सामने आई। इनमें एंटी-पेपर लीक बिल भी शामिल बताया गया है। इसके अलावा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से जुड़ा विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम यानी NCDC से संबंधित संशोधन विधेयक भी इस सूची में शामिल रहे। इससे संसद में विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा को लेकर सवाल उठे।
इन कानूनों में भी हुआ बदलाव
संसद के इस सत्र में सिर्फ राजनीतिक मुद्दों से जुड़े विधेयक ही नहीं, बल्कि कई दूसरे महत्वपूर्ण कानूनों में बदलाव भी किए गए। जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से संबंधित कानून, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या से जुड़ा कानून, टैक्सेशन और बैंकर्स बुक्स से संबंधित कानूनों में बदलाव वाले विधेयक भी पारित हुए। इनका सीधा संबंध प्रशासन, न्याय व्यवस्था और वित्तीय कामकाज से है।
MSME भुगतान से जुड़ा बिल भी पास
छोटे और मध्यम कारोबार से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक को भी इस सत्र में मंजूरी मिली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए MSME भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों में बदलाव का रास्ता साफ हुआ। छोटे कारोबारों के लिए समय पर भुगतान एक बड़ा मुद्दा रहा है। इसलिए इस कानून को कारोबारी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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विपक्ष ने इन मुद्दों पर मांगी चर्चा
विपक्ष ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन को लेकर विपक्षी दलों ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग भी की। इसके अलावा अयोध्या राम मंदिर दान विवाद सहित कई दूसरे मुद्दों पर चर्चा की मांग की गई। इन मांगों को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में कई बार हंगामा और गतिरोध देखने को मिला।
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FCRA बिल JPC के पास गया
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA संशोधन बिल, 2026 को लेकर भी सत्र में बड़ा फैसला हुआ। लोकसभा ने इसे संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। अब समिति विधेयक के प्रावधानों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट देगी। इससे बिल पर आगे विस्तृत विचार और चर्चा का रास्ता खुल गया है।
हंगामे के साथ विधायी कामकाज भी जारी
इस मानसून सत्र की सबसे बड़ी तस्वीर यही रही कि एक तरफ संसद में लगातार राजनीतिक टकराव और हंगामा चलता रहा, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने 19 विधेयक पारित करा दिए। एंटी-पेपर लीक से लेकर ‘केरलम’ नाम परिवर्तन, NCDC, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, टैक्सेशन, बैंकर्स बुक्स और MSME भुगतान व्यवस्था से जुड़े विधेयक इसका हिस्सा रहे। हालांकि सात विधेयकों के बेहद कम समय में बिना चर्चा पारित होने का मुद्दा आगे भी संसद की कार्यप्रणाली और विधायी बहस को लेकर सवाल खड़े कर सकता है।
वहीं FCRA बिल के JPC के पास जाने से इस पर विस्तृत जांच और राजनीतिक चर्चा की संभावना बढ़ गई है। अब देखना होगा कि आने वाले सत्र में NDA और विपक्ष के बीच टकराव कम होता है या राजनीतिक रार आगे भी जारी रहती है।
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