Delhi : पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण की शुरुआत वर्ष 1925 में हुई थी, लेकिन इसके बाद के 90 वर्षों में केवल 30 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क का ही विद्युतीकरण हो पाया। वहीं पिछले एक दशक में 70 प्रतिशत विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर देश ने इस क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि रेलवे विद्युतीकरण की यात्रा लगभग एक सदी पहले शुरू हुई थी, लेकिन विकास की गति बेहद धीमी रही। उन्होंने कहा, “आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश में रेलवे विद्युतीकरण का काम 1925 में शुरू हुआ था। इसके बाद 90 वर्षों में केवल 30 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण हो पाया।”
उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में जिस तेजी और संकल्प के साथ काम किया गया, उसके परिणामस्वरूप शेष 70 प्रतिशत नेटवर्क का भी विद्युतीकरण पूरा कर लिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा, “90 साल में 30 प्रतिशत और 10 साल में 70 प्रतिशत। यही लक्ष्य प्राप्ति की गति और कार्य संस्कृति का प्रमाण है।”
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प्रधानमंत्री ने कहा कि रेलवे के व्यापक विद्युतीकरण से भारत को कई स्तरों पर लाभ मिला है। इससे डीजल के आयात पर निर्भरता कम हुई है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि बिजली से चलने वाली ट्रेनों के बढ़ते उपयोग से रेलवे अधिक स्वच्छ और ऊर्जा-कुशल बना है।
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100 प्रतिशत रेलवे विद्युतीकरण
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो चुका है। देश के ब्रॉड गेज रेलवे नेटवर्क का लगभग 99.6 प्रतिशत हिस्सा विद्युतीकृत हो चुका है। इस मामले में भारत केवल स्विट्जरलैंड से पीछे है, जहां 100 प्रतिशत रेलवे विद्युतीकरण है, हालांकि वहां का रेल नेटवर्क भारत की तुलना में काफी छोटा है।
रेलवे विद्युतीकरण के मामले में भारत अब कई प्रमुख देशों से आगे निकल चुका है। चीन का रेलवे नेटवर्क लगभग 82 प्रतिशत, स्पेन का 67 प्रतिशत, जापान का 64 प्रतिशत, फ्रांस का 60 प्रतिशत और यूनाइटेड किंगडम का 39 प्रतिशत तक विद्युतीकृत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत केवल रेलवे विद्युतीकरण तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को भी तेजी से अपना रहा है। उन्होंने कहा कि देश ने हाल ही में हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली अपनी पहली ट्रेन शुरू की है, जो इस क्षेत्र में भारत की नई उपलब्धि है।
‘यह अपनी तरह की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली ट्रेन’
प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत ने ईंधन के इस नए क्षेत्र में भी कदम रख दिया है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हो चुकी है और मुझे यह बताते हुए खुशी है कि यह अपनी तरह की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली ट्रेन है।” करीब 2,600 यात्रियों की क्षमता वाली यह ट्रेन स्वच्छ ईंधन-आधारित रेल परिवहन की संभावनाओं को प्रदर्शित करेगी। सरकार का मानना है कि हाइड्रोजन तकनीक भविष्य में पारंपरिक डीजल आधारित ट्रेनों का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बन सकती है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का लक्ष्य केवल दुनिया की बराबरी करना नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों में अग्रणी भूमिका निभाना है। रेलवे आधुनिकीकरण, विद्युतीकरण और हरित ऊर्जा आधारित परिवहन के क्षेत्र में हुई प्रगति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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