नई दिल्ली, 8 जनवरी। प्रधानत्री नरेंद्र मोदी की 5 जनवरी को फिरोजपुर रैली के दौरान हुई सुरक्षा चूक के मामले में पंजाब की पूरी कैबिनेट ही बचाव के साथ-साथ बीजेपी पर जमकर हमले कर रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी खुद इस मामले पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। हालांकि अब इस मामले में स्पष्टीकरण देते सीएम चन्नी का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वो पीएम मोदी के लिए तू और तुसी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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टांडा रैली में चन्नी के पीएम मोदी के लिए विवादित बोल
वायरल हो रहा वीडियो टांडा में हुई रैली का है। जिसमें मुख्यमंत्री चन्नी लोगों को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि बठिंडा एयरपोर्ट पर हमारे वित्त मंत्री मनप्रीत बादल को पीएम मोदी ने कहा कि चन्नी जी को बोल देना कि मैं जान बचाकर आ गया। ”ओ यार, कोई खतरा तैनू होया नी, तुसी ऐने जिम्मेवारी पोस्ट दे बंदे हो, तुहाडे नेडे कोई बंदा नी आया, कोई नारा नी वजया, कोई डला नहीं चलया, कोई गोली भी नहीं चल्ली, केडी जान वचाके आगे जी तुसी, मैं इस गल्ल ते हैरान हां।
चन्नी का सरदार पटेल के शब्दों से भी वार
वहीं उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की तस्वीर के साथ एक ट्वीट शेयर करते हुए लिखा है कि ”जिसे कर्त्तव्य से ज़्यादा जान की फ़िक्र हो, उसे भारत जैसे देश में बड़ी जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए। इस ट्वीट को भी पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक के मामले से जोड़ा जा रहा है।
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जिसे कर्त्तव्य से ज़्यादा जान की फ़िक्र हो, उसे भारत जैसे देश में बड़ी जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए !
– सरदार वल्लभभाई पटेल pic.twitter.com/zefpEroVAF
— Charanjit Singh Channi (@CHARANJITCHANNI) January 7, 2022
चन्नी का बीजेपी पर मामले को बढ़ा चढ़ाकर पेश करने के आरोप
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पंजाब सीएम चन्नी ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 जनवरी को फिरोजपुर की घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। पीएम अपनी जान को खतरा बताकर राज्य की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को गिराना चाहते हैं। मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि जब प्रदर्शनकारी उनसे करीब 1 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर थे तो पीएम मोदी की जान को कैसे खतरा हो सकता है। जहां पीएम मोदी का काफिला रूका था, वहां एक नारा नहीं लगा, ना ही कोई पत्थर वहां उछाला गया और ना ही कोई उनके पास पहुंचा, तो कैसे उनकी जान को खतरा हो गया?।
किसानों पर नहीं करसते बल का प्रयोग- चन्नी
सीएम चन्नी ने कहा कि अगर उनकी पुलिस ने 5 जनवरी को फिरोजपुर में पीएम मोदी के काफिले के सामने सड़क पर धरना देने उतरे किसानों पर बल का इस्तेमाल किया होता तो बरगाड़ी जैसी एक और घटना हो सकती थी। फिर बादलों और हमारे बीच कोई अंतर नहीं रह जाता। जब समझा-बुझाकर और आश्वासन देकर प्रदर्शनकारियों को हटाया जा सकता है, तो केंद्र हमसे बल के इस्तेमाल की उम्मीद क्यों करती है?