Delhi : ‘कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी विकासशील देशों पर डालना उचित नहीं है’ पीएम मोदी शुक्रवार को दिल्ली में ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान की भी बात की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर भारत द्वारा लगाए गए प्रतिबंध और प्राकृतिक खेती का जिक्र किया।
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NGT की ओर से आयोजित सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी विकासशील देशों पर डालना उचित नहीं है। भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है, जबकि विकसित देशों में यह भारत की तुलना में छह गुना अधिक है।
पीएम मोदी ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत देश भर में करोड़ों पेड़ लगाए गए हैं और यह मुहिम लगातार जारी है। प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए एक और बड़ी चुनौती रही है, जिसके चलते भारत ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया। ‘रिड्यूस, रियूज़ और रीसायकल’ (कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और रीसायकल) के मंत्र को अपनाते हुए हमने सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन’ के तहत आज देश में लगभग 12.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए 24,000 क्लस्टर बनाए गए हैं। इसके अलावा, जलवायु के अनुकूल लगभग 3,000 किस्म की फसलें विकसित की गई हैं। एग्रो-फॉरेस्ट्री (कृषि-वानिकी) को बढ़ावा देकर हम सक्रिय रूप से अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम कर रहे हैं।
‘विचार व समाधान आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूती का आधार’
उन्होंने कहा कि आज करोड़ों लोगों की सक्रिय भागीदारी से भारत में जल संरक्षण के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व काम हो रहा है। मुझे खुशी है कि देश भर में 70,000 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए हैं। ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत देश में लगभग 1.5 करोड़ वर्षा जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं, जिनसे वर्षा जल का संरक्षण किया जा रहा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विचारधारा कहती है। ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’। इसी मार्गदर्शक विचारधारा के साथ, भारत एक जिम्मेदार और टिकाऊ भविष्य बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है। मुझे विश्वास है कि इस सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाएं और उनसे मिलने वाले नए विचार व समाधान आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूती का आधार बनेंगे।
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