Mann Ki Baat : PM मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 139वें एपिसोड को संबोधित किया। उन्होंने बिहार के पूर्णिया के मखाने का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में नदी को बचाने के लिए ग्रामीणों के अभियान का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदाय की भी बात की। उन्होंने कहा कि ‘त्योहारों के मौसम में सभी ने एक बदलाव महसूस किया होगा। अब लोग खरीदारी करते समय स्वदेशी उत्पादों को बहुत महत्व देने लगे हैं।’
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उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल की भावना अब हमारे उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचा रही है। बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंच रहा है। कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल अब मालदीव जा रही है, भारत के किसानों के लिए दुनिया में नए बाजार खुल रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि ‘हमारे यहां प्रकृति के प्रति सम्मान की बहुत पुरानी परंपरा रही है। हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया है कि अपने आस-पास स्वच्छता रखना, जल-स्रोतों की देखभाल करना ये हमारी अपनी ज़िम्मेदारी है। यही भाव उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में भी देखने को मिलता है। यहां लोगों ने मिलकर एक नदी को नया जीवन देने का प्रयास किया है। ये नदी हेवल है।’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में लोगों ने मिलकर ‘हेवल’ नदी में नई जान फूंकने की कोशिश की है। कुछ समय पहले, हेवल नदी का जलस्तर घटने लगा था और आस-पास के प्राकृतिक जल स्रोत भी सूख रहे थे। इसके जवाब में स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नदी को बचाने के लिए एक अभियान शुरू किया। इस पहल के तहत, बारिश के पानी को संचित करने, भूजल स्तर को फिर से बढ़ाने (ग्राउंडवाटर रिचार्ज) और बड़ी संख्या में पेड़ लगाने के उपाय किए गए। आज, इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, हेवल नदी फिर से जीवित हो उठी है और दर्जनों प्राकृतिक जल स्रोत भी बहाल हो गए हैं।’
पीएम मोदी ने कहा कि ‘महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों ने अपने उत्पादों की पैकेजिंग पर बहुत ध्यान दिया है। यहां ‘शबरी नेचुरल्स’ के जरिए शहद, महुआ, चीड़ और बांस से बने उत्पादों को बाज़ार में लाया जा रहा है। इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की छाप देखने को मिलती है। आपको यह जानकर खुशी होगी कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिज़ाइन अवार्ड’ मिला है।’
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उन्होंने कहा कि ’12 साल पहले विजयादहमने के पावन अवसर पर हमने ‘मन की बात’ की शुरुआत की थी। तब से, हमारा यह सफर बिना रुके लगातार जारी है। इस सफर में आप सभी मेरे सहयात्री भी रहे हैं और मार्गदर्शक भी। मेरे लिए ‘मन की बात’ हमारे देश के आम लोगों की कड़ी मेहनत, साहस, संकल्प, समर्पण और सेवा-भाव का जश्न मनाने का एक शानदार अवसर रहा है। हमारे देश में सदियों से तीर्थयात्रा की परंपरा रही है। मेरे लिए, ‘मन की बात’ किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है। यह एक ऐसी यात्रा है, जिसके ज़रिए मैं देशवासियों के प्रयासों को करीब से समझ पाता हूं और उनके योगदान के प्रति सम्मान प्रकट कर पाता हूं।’
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