CEC Controversy : प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को कहा कि ‘यह बहुत ही पुरानी और कमजोर कहानी है। तथ्य और सबूत मौजूद हैं। मेरे भाई ने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबूत दिखाए हैं।’ उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार विवाद पर मीडिया से बात करते हुए बयान दिया है।
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कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘अब यह बिल्कुल साफ़ है। 13 करोड़ वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। यह एक बेतुका बहाना है और BJP को ऐसे बेतुके बहाने बनाना बंद कर देना चाहिए। यह एक लचर बहाना है और भाजपा को ऐसे बहाने बनाना बंद करना चाहिए। अगर वे चुनावों में गड़बड़ी कर रहे हैं और अगर उनका नेतृत्व चुनाव आयोग से यह काम करा रहा है तो यह देशद्रोह का काम है और उन्हें इसके बारे में पता होना चाहिए और इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।’
उन्होंने कहा कि ‘अगर वे (भाजपा) ऐसा कर रहे हैं तो वे इसे कह क्यों नहीं सकते? वे किस बात से डरते हैं? कितने साल हो गए हैं कि वे चुनावों में धांधली कर रहे हैं? स्वाभाविक है कि वे हर समय इतने ओवरकॉन्फिडेंट रहते हैं।’
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग के फैसलों और आदेशों पर दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में 14 आपत्तियां दर्ज की थीं, जब सुनवाई नहीं हुई तो कैबिनेट सचिव को भी पत्र लिखा था।
CEC विवाद पर राहुल गांधी का बयान
CEC विवाद पर राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि ‘हम सरकार के कामकाज को समझ सकते हैं, लेकिन हम यह नहीं समझ सकते कि एंटी-इनकंबेंसी कैसे गायब हो जाती है। सद्दाम हुसैन के इराक में एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती। उत्तर कोरिया में यह नहीं होती। इस धरती पर ऐसी कोई डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) नहीं है, जहां एंटी-इनकंबेंसी न हो।’
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राहुल गांधी ने कहा था कि ‘मैं आपको ये वीडियो इसलिए दिखा रहा हूं, क्योंकि मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूं और मैंने 50 से ज़्यादा साल एक राजनीतिक परिवार में बिताए हैं। लोकतांत्रिक माहौल में काम करने वाला कोई भी राजनीतिक नेता ऐसा बयान नहीं दे सकता, क्योंकि भारत में ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ (सत्ता-विरोधी लहर) नाम की एक बुनियादी ताकत होती है, जो बहुत तेज़ी से किसी भी सरकार का विरोध करने लगती है और यह किसी को नहीं बख्शती।’
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