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आरबीआई मौद्रिक नीति: नहीं बढ़ेंगी ब्याज दरें, जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रहने का अनुमान

वित्त वर्ष 2022-23 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है। यह लगातार 10वां मौका है, जब रेपो दर में बदलाव नहीं किया गया है।

By इंडिया वॉइस 

Updated Date

नई दिल्ली, 10 फरवरी। रिर्जव बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की समीक्षा का ऐलान कर दिया है। दास ने गुरुवार को बताया कि इस बार भी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है। यह लगातार 10वां मौका है, जब रेपो दर में बदलाव नहीं किया गया है। इससे पहले 22 मई, 2020 को रेपो दर में बदलाव कर इसे रिकार्ड निचले स्तर पर लाया गया था।

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रेपो रेट में नहीं किया गया बदलाव

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एमपीसी की बैठक में लिये गए निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि रेपो रेट बिना किसी बदलाव के साथ 4 फीसदी पर बरकरार रहेगा। एमएसएफ रेट और बैंक रेट बिना किसी बदलाव के साथ 4.25 फीसदी रहेगा जबकि रिवर्स रेपो रेट भी बिना किसी बदलाव के साथ 3.35 फीसदी रहेगा। शक्तिकांत दास ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में आर्थिक वृद्धि दर 9.2 फीसदी पर और महंगाई दर 5.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।

जीडीपी 7.8 रहने की उम्मीद

शक्तिकांत दास ने आर्थिक वृद्धि परिदृश्य के बारे में कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है। इसके साथ ही आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए सीपीआई आधारित महंगाई दर 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है। महंगाई दर के बारे में बताते हुए दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में 4.9 फीसदी, दूसरी तिमाही में 5 फीसदी, तीसरी तिमाही में 4 फीसदी और चौथी तिमाही में 4.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।

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गवर्नर शक्तिकांत दास ने आगे कहा कि मौद्रिक नीति समिति ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। दास ने कहा कि एमपीसी कमेटी के 6 में से 5 सदस्य पॉलिसी रुख ‘अकोमोडेटिव’ रखने के पक्ष में थे। उन्होंने कहा कि सीपीआई उम्मीदों के अनुरूप है और खाद्य कीमतों में आशावाद को जोड़ने के लिए आसान है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना एक बड़ा जोखिम है। दास ने कहा कि दिसंबर में महंगाई दर में बढ़ोतरी कोरोना के ओमिक्रोन वैरिएंट के बढ़ने से हुई। हालांकि, उन्होंने कहा कि अनाज का बफर स्टॉक खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिए शुभ संकेत है।

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