गाजीपुर। RSS के सर संघ चालक मोहन भागवत गुरुवार को अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत गाजीपुर के भुड़कुड़ा क्षेत्र के हथियाराम मठ पहुंचे। जहां उन्होंने अति प्राचीन बुढ़िया माई की विधिवत पूजा अर्चना की और फिर प्रबुद्ध जनों को संबोधित किया।
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इस मौके पर उनका स्वागत मठ के 26 वें पीठाधीश्वर व महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति जी महाराज ने अंगवस्त्रम और स्मृति चिह्न देकर किया। इस अवसर पर संघ प्रमुख ने परमवीर चक्र स्व.अब्दुल हमीद के पुत्र और महावीर चक्र स्व. राम उग्रह पांडे की अंधी बेटी को भी सम्मानित किया।
अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने राष्ट्र निर्माण और विक्तिनिर्माण के साथ प्राचीन भारत वर्ष की सीमाओं का उल्लेख करते हुए हिंदू राष्ट्र की परिकल्पनाओं को मंच से साझा किया। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संतों की एक विशेषता है। वो दूसरों के गुणों को पहाड़ बना देते हैं। वो दूसरे की अच्छाई को magnify ग्लास से देखते हैं। उनके प्रत्येक शब्द में उनकी आत्मीयता है। ये आत्मीयता अच्छे को खींच लाती है।
कहा कि सम्पूर्ण विश्व आत्मीयता का भूखा है। सबमें वही आत्मा है जो परमात्मा है। विज्ञान कहता है कि भगवान हमारे टेस्ट ट्यूब में आए तभी मानेंगे। लेकिन हमारे पूर्वजों ने अपनी आत्मा में झांककर देखा। उन्होंने अंतःस्फूर्ति से अपने को जाना। सत्य को पाना है तो भौतिक दुनिया से आध्यात्मिक दुनिया में चलो।
कहा कि विज्ञान के बिना आध्यात्म नहीं और आध्यात्म के बिना विज्ञान नहीं है। जितनी सुविधाएं बढ़ रहीं, उतना असंतोष भी बढ़ रहा। इसे समझना होगा कि मेरी उन्नति और पर्यावरण की उन्नति एक ही है।
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कहा कि 3 हजार वर्ष पहले तक हम विश्व गुरु थे। हम सारी दुनिया को ज्ञान देने वाले शिव थे। हम देवी देवताओं की पूजा मन की शांति के लिए करते हैं। हम जो करते हैं वो भरना पड़ता है, इसलिए अच्छा करो।
अपना हित बलिदान करके देशहित की सोचें लोग
कहा कि पूरा भारत भारत माता का मंदिर है। अपना हित बलिदान करके देश हित की सोचें। इसके लिए मन साफ होना चाहिए। हम सबको शिव संकल्प लेना चाहिए कि भारत को मॉडल बनाना है तो हमको मॉडल बनना होगा आदर्श होना होगा।अच्छी बातें सोचकर मन को ठीक रखना ही शिव की आराधना है।