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SuperTech Twin Tower Demolition : सुपरटेक के 40 मंजिला अवैध टावरों को दो हफ्ते में तोड़ने का काम शुरू करे नोएडाः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वह दो हफ्ते के अंदर सुपरटेक के अवैध 40 मंजिला ट्विन टावरों को गिराने का काम शुरू करे।

By इंडिया वॉइस 
Updated Date

नई दिल्ली, 07 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट ने नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) को निर्देश दिया है कि वह सुपरटेक एमरल्ड कोर्ट में बने 40 मंज़िला दो अवैध टावरों को गिराने का काम दो हफ्ते में शुरू करे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि नोएडा अथॉरिटी 72 घंटे में इस मसले पर बैठक बुलाए।

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सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी को कहा था कि नोएडा के सुपरटेक के फ्लैट खरीदारों के पैसे 28 फरवरी तक लौटाए जाएं। कोर्ट ने आदेश दिया था कि एमिकस क्यूरी की ओर से की गई गणना के मुताबिक पैसे लौटाए जाएं। कोर्ट ने कहा था कि जिन फ्लैट खरीदार का होम लोन का बकाया है, उसका भुगतान 10 अप्रैल तक सुपरटेक करे। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा था कि जिन फ्लैट खरीदार ने सुपरटेक के साथ समझौता कर लिया है, वैसी स्थिति में समझौते की शर्तें दोनों पक्षों को माननी होगी। 17 जनवरी को कोर्ट ने सुपरटेक एमरल्ड कोर्ट के 40 मंज़िला ट्विन टावर को गिराने का जिम्मा मुंबई की एडिफिस इंजीनियरिंग को देने का आदेश दिया था।

खरीदारों ने सुपरटेक के खिलाफ किया अवमानना का केस

फ्लैट खरीदारों ने सुपरटेक के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि सुपरटेक ने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया। याचिका में कहा गया है कि सुपरटेक ने फ्लैट खरीदारों को पैसे वापस देने के लिए बुलाया। जब वे पैसे लेने सुपरटेक के दफ्तर गए तो उनसे कहा गया कि उन्हें कुछ कटौती कर किश्तों में पैसे दिए जाएंगे।

क्या था मामला

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सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त, 2021 को नोएडा के सुपरटेक एमरल्ड कोर्ट में 40 मंज़िल के दो अवैध टावरों को गिराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुए ये आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि तीन महीने में निर्माण हटाया जाए। कोर्ट ने कहा था कि फ्लैट खरीदारों को दो महीने में पैसा वापस दिया जाए। कोर्ट ने फ्लैट खरीदारों को 12 फीसदी सालाना ब्याज के साथ पैसे लौटाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि निर्माण गिराने का खर्च सुपरटेक वहन करेगा। कोर्ट ने कहा था कि इस अवैध निर्माण में बिल्डर और अधिकारियों की मिलीभगत है।

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों टावरों को अवैध घोषित कर गिराने के आदेश दिए थे लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी और टावर को सील करने के आदेश दिए थे।

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