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तालिबान ने पूर्ववर्ती अफगान सरकार के सौ से अधिक लोगों को मारा, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खुलासा

सुरक्षा परिषद की विगत रविवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि तालिबान ने भले ही अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना और पूर्ववर्ती अशरफ गनी सरकार के लोगों को एमनेस्टी के तहत बख्श देने का दावा किया हो लेकिन असल में उसने पूर्ववर्ती अफगान सरकार के सौ से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया है।

By इंडिया वॉइस 
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UN Report : अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से लोकतांत्रिक सरकार के 100 से अधिक प्रमुख लोगों की हत्या हो चुकी है। यह खुलासा संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एनतोनियो गुतेरस ने सुरक्षा परिषद की एक रिपोर्ट में किया है। जानकारी के मुताबिक पूर्ववर्ती अफगान सरकार के सौ से अधिक सदस्यों की तालिबान ने हत्या कर दी है। मरने वालों में अंतरराष्ट्रीय सैन्य बलों के भी लोग हैं।

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संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाये जा रहे आरोपों का तालिबान ने किया खंडन 

इस बीच, तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र के इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने किसी की भी हत्या नहीं की है। गुतेरस ने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की विगत रविवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि तालिबान ने भले ही अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना और पूर्ववर्ती अशरफ गनी सरकार के लोगों को एमनेस्टी के तहत बख्श देने का दावा किया हो लेकिन असल में उसने पूर्ववर्ती अफगान सरकार के सौ से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और मीडिया को बनाया जा रहा है निशाना 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बताया कि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक मिशन के अनुसार आइएसआइएल-केपी से जुड़े पचास से अधिक लोगों को उनकी जानकारी के मुताबिक मारा जा चुका है। तालिबान द्वारा बार-बार इंकार करने के बावजूद अफगानिस्तान से पुख्ता जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि वहां पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, मीडिया के लोगों को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

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संयुक्त राष्ट्र अभियानों ने 44 ऐसे मामले दर्ज किए हैं जिसमें पत्रकारों को कुछ समय तक के लिए तालिबान के हाथों गिरफ्तार करके प्रताडि़त किया गया था। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के मुताबिक 2.28 करोड़ लोग मार्च 2022 से खाद्य संकट और असुरक्षा के दौर से गुजरने लगेंगे। इनमें से 90 लाख लोगों की स्थिति खाद्यान्न संकट के कारण बेहद दयनीय होगी। देश के पांच साल से कम उम्र के आधे बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हो जाएंगे।

 

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