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उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज़, क्या भाजपा में शामिल होंगे कांग्रेस के दस विधायक?

कांग्रेस के तीन बार के विधायक और एक समय में हरीश रावत के हनुमान कहे जाने वाले हरीश धामी ने जिस तरह से संगठन के उच्चाधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, वह काफी कुछ संकेत कर रहा है।

By Akash Singh 
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विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त ही काफी नहीं थी, जो उत्तराखंड कांग्रेस के सिर पर एक नया और बड़ा संकट आन पड़ा है। बगावत पर उतारू कांग्रेस के कुछ विधायक अब क्या कर गुजरते हैं, यह देखने वाली बात होगी। वर्ष 2016 के बाद एक बार फिर कांग्रेस में टूट के आसार बनते दिख रहे हैं। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने अभी विधिवत पद संभाला भी नहीं है, लेकिन इससे पहले ही एक कड़ा इम्तिहान उनके सामने आ खड़ा हुआ है।

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कांग्रेस के तीन बार के विधायक और एक समय में हरीश रावत के हनुमान कहे जाने वाले हरीश धामी ने जिस तरह से संगठन के उच्चाधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, वह काफी कुछ संकेत कर रहा है। खबरें दस से ज्यादा कांग्रेस विधायकों की बैठक को लेकर गर्म है, जिसमें पार्टी छोड़ने पर फैसले की बात कही जा रही है। कई विकल्पों पर चर्चा होनी बताई जा रही है, जिसमें एक अलग दल के निर्माण से लेकर भाजपा ज्वाइन करने तक की बातें शामिल हैं। बगावत पर उतारू विधायकों का जोर उस आकडे़ को हासिल करने का है, जिसके चलते उनकी विधायकी पर कोई खतरा न मंडराए। ऐसी स्थिति में 13 विधायकों की लामबंदी अपरिहार्य होगी। कांग्रेस के वर्तमान विधानसभा में कुल 19 विधायक हैं।

दरअसल, विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की गुटबाजी की आग को जिस कदर हवा मिली, उसे प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उपनेता की नियुक्तियों ने प्रचंड बना दिया है। बगावत के मूड में नजर आ रहे कांग्रेस के कुछ विधायक तो अब कदम पीछे खींचने के लिए कतई तैयार नहीं हैं। कुछ विधायकों की स्थिति 50-50 जैसी है, जो कि देश, काल परिस्थिति के हिसाब से निर्णय लेंगे।

कांग्रेस के इन विधायकों की बगावत की स्टोरी के साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उपचुनाव का एपिसोड भी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। धारचूला विधायक हरीश धामी खुले तौर पर कह रहे हैं कि अपनी जनता के हित में वह मुख्यमंत्री के लिए सीट खाली कर सकते हैं। वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए भी धामी ने धारचूला की सीट खाली की थी। बहरहाल, विधायकों के तेवरों ने कांग्रेस के उच्चाधिकारियों की सांसें सुखा दी हैं। मान-मनौव्वल के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन वे फिलहाल बहुत असरकारी नहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस का अंतर्विरोध उत्तराखंड की सियासत में किस नई कहानी को अंजाम देता है, इस पर नजरें टिक गई हैं।

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