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विनय शंकर तिवारी का सियासी सफर: पिता हरिशंकर की विरासत से विधायक बनने तक

By HO BUREAU 

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विनय शंकर तिवारी का सियासी सफर: पिता हरिशंकर की विरासत से विधायक बनने तक

पूर्वांचल की सियासत में एक ऐसा परिवार, जिसका नाम दशकों तक सत्ता और सियासत के गलियारों में गूंजता रहा… आज उसी परिवार के वारिस और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विनय शंकर तिवारी का जन्मदिन है। पिता हरिशंकर तिवारी की मजबूत राजनीतिक विरासत से लेकर खुद विधायक बनने तक, विनय शंकर तिवारी का सियासी सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। तो आइए, उनके जन्मदिन पर जानते हैं तिवारी परिवार के उस सियासी रसूख की पूरी कहानी…
विनय शंकर तिवारी छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे। साल 2008 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा और चुनावी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने बलिया लोकसभा उपचुनाव में सपा प्रत्याशी नीरज शेखर के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन इस चुनाव में भी उन्हें हार मिली।
लगातार दो चुनाव हारने के बाद विनय शंकर तिवारी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में चिल्लूपार सीट से बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की। उन्होंने राजेश त्रिपाठी को हराकर पहली बार विधायक बनने में कामयाबी हासिल की।हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले विनय शंकर तिवारी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के बावजूद उन्हें एक बार फिर राजेश त्रिपाठी के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
विनय शंकर तिवारी के राजनीतिक सफर के साथ उनके पिता हरिशंकर तिवारी का नाम भी हमेशा चर्चा में रहा है। पूर्वांचल की राजनीति में हरिशंकर तिवारी का लंबे समय तक खासा प्रभाव माना जाता रहा। वे 1985 से 2007 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे और अलग-अलग सरकारों में मंत्री पद भी संभाला।
हरिशंकर तिवारी की पूर्वांचल की राजनीति में मजबूत पकड़ और ब्राह्मण समाज में प्रभाव के चलते तिवारी परिवार लंबे समय तक यूपी की सियासत में एक महत्वपूर्ण नाम बना रहा।

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तो ये थी विनय शंकर तिवारी के सियासी सफर और पूर्वांचल की राजनीति में तिवारी परिवार के प्रभाव की कहानी। पिता हरिशंकर तिवारी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए विनय शंकर तिवारी ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश की है। जन्मदिन के इस खास मौके पर उन्हें इंडिया वाइस की ओर से ढेरों शुभकामनाएं। उम्मीद है कि आने वाले समय में उनका सियासी सफर नई ऊंचाइयों तक पहुंचे।

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इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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