सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार निजी PG और हॉस्टल के लिए नया कानून लाने की तैयारी में है। इसमें सुरक्षा, लाइसेंस, CCTV, वार्डन और किराये से जुड़े नियम होंगे। ✍️अरविंद कुमार
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सत्य निकेतन पीजी हादसे के बाद दिल्ली सरकार अब राजधानी में संचालित निजी पीजी और छात्रावासों को नियमन के दायरे में लाने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने प्रस्तावित कानून का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें पीजी के अनिवार्य पंजीकरण और लाइसेंस से लेकर भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, पुलिस सत्यापन, सीसीटीवी, वार्डन, सुरक्षा गार्ड, किराया और छात्रों की शिकायतों तक के लिए नियम तय किए जाएंगे। साथ ही खाली पड़ी सरकारी इमारतों को छात्रावास के रूप में इस्तेमाल करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत हादसे के बाद राजधानी में चल रहे पीजी और निजी छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। इसके बाद दिल्ली सरकार ने पीजी और छात्रावासों के संचालन को एक तय कानूनी व्यवस्था के तहत लाने की तैयारी शुरू कर दी है।
सरकार अब पीजी नियमन से जुड़ा नया कानून लाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए कानून का प्रारूप तैयार किया जा रहा है, जिसमें पीजी संचालकों की जिम्मेदारी से लेकर छात्रों की सुरक्षा और किराये तक के नियम शामिल किए जा रहे हैं। हालांकि, अभी यह कानून प्रस्तावित चरण में है। प्रारूप तैयार होने, सरकार की मंजूरी और आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसके प्रावधान अंतिम रूप से लागू होंगे।
प्रस्तावित कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में समिति काम कर रही है।
समिति पीजी के पंजीकरण, लाइसेंस, भवन सुरक्षा, किराये, छात्रों की शिकायत, सुरक्षा व्यवस्था और पीजी संचालकों की जवाबदेही जैसे मुद्दों को कानून के दायरे में लाने पर काम कर रही है।
सरकार की कोशिश है कि दिल्ली में पीजी संचालन को लेकर अलग-अलग विभागों की व्यवस्थाओं को एक नियामक ढांचे के तहत लाया जाए।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कॉलेज, विश्वविद्यालय और पंजीकृत कोचिंग संस्थानों में संस्थागत आवास समिति बनाने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।
इस समिति में दो शिक्षक, दो निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि, जिनमें कम से कम एक महिला होगी, एनएसएस या एनसीसी का प्रतिनिधि, नगर निगम का वार्ड स्तर का अधिकारी और पुलिस संपर्क अधिकारी शामिल होंगे।
यह समिति छात्रों की आवास संबंधी शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी में भूमिका निभाएगी।
नए कानून के प्रारूप में पीजी संचालन के लिए लाइसेंस और अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान रखा जा रहा है।
पीजी संचालक को संबंधित नगर निगम प्राधिकरण से लाइसेंस लेना होगा। इसके अलावा पुलिस सत्यापन, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र भी जरूरी किए जाने का प्रस्ताव है।
हर पंजीकृत पीजी को एक अलग पंजीकरण संख्या दिए जाने की योजना है, जिससे सरकार के पास पीजी से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
प्रस्तावित कानून के तहत पीजी की जानकारी को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की भी योजना है। इसके लिए ‘GovPG’ पोर्टल तैयार करने का प्रस्ताव है।
पोर्टल पर पीजी का पता, संचालक की जानकारी, क्षमता, किराया, पंजीकरण और सुरक्षा ऑडिट जैसी जानकारियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
छात्र इसी पोर्टल के माध्यम से शिकायत भी दर्ज कर सकेंगे। खास बात यह है कि प्रस्तावित व्यवस्था में शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने और शिकायत पर हुई कार्रवाई की स्थिति देखने की सुविधा भी हो सकती है।
प्रस्तावित कानून में पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए कई अनिवार्य प्रावधान रखे जा रहे हैं।
पीजी के प्रवेश द्वार और साझा स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी होगा। कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है।
जिन पीजी में 15 या उससे अधिक छात्र रहेंगे, वहां रात के समय लाइसेंस प्राप्त सुरक्षा गार्ड रखने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा प्रत्येक पीजी में वार्डन की व्यवस्था होगी। वार्डन को पीजी से अधिकतम 500 मीटर की दूरी के भीतर रहना या कार्यालय रखना होगा, ताकि आपात स्थिति में वह करीब 15 मिनट के भीतर उपलब्ध हो सके।
प्रस्तावित कानून में सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि छात्रों से लिए जाने वाले किराये को लेकर भी व्यवस्था बनाने की योजना है।
इलाके के हिसाब से किराये की सीमा तय करने के लिए किराया नियमन समिति बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसका मकसद पीजी संचालकों की ओर से मनमाने तरीके से किराया बढ़ाने पर रोक लगाना है।
हालांकि, अलग-अलग इलाकों में किराये की अधिकतम सीमा कितनी होगी, यह अंतिम कानून और नियम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए सरकार खाली पड़ी एमसीडी और डीडीए की इमारतों का इस्तेमाल करने की संभावना भी तलाश रही है।
जरूरत के मुताबिक ऐसी इमारतों को छात्रावास में बदलने का विकल्प देखा जा रहा है। इससे छात्रों को निजी पीजी के मुकाबले वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
सरकार प्रमुख छात्र क्षेत्रों में संचालित पीजी इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच कराने पर भी जोर दे रही है।
खास तौर पर ऐसी इमारतों की जांच की जाएगी जहां अवैध निर्माण, अतिरिक्त मंजिल या भवन नियमों के उल्लंघन की आशंका है। इसका उद्देश्य किसी संभावित हादसे से पहले जोखिम वाली इमारतों की पहचान करना है।
प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद दिल्ली में पीजी चलाने के लिए सिर्फ कमरा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। संचालकों को लाइसेंस, पंजीकरण, भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, पुलिस सत्यापन, सीसीटीवी, वार्डन और सुरक्षा व्यवस्था जैसी शर्तों का पालन करना होगा।
वहीं छात्रों को पंजीकृत पीजी की जानकारी ऑनलाइन देखने, शिकायत दर्ज कराने और उस पर हुई कार्रवाई की जानकारी लेने का माध्यम मिलेगा।
सरकार की ओर से तैयार किया जा रहा यह कानून का प्रारूप अभी अंतिम कानून नहीं है। प्रारूप को अंतिम रूप दिए जाने के बाद सरकार की मंजूरी और आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी होगी।
इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किराये की सीमा क्या होगी, लाइसेंस की फीस कितनी होगी, नियमों का उल्लंघन करने पर कितना जुर्माना लगेगा और पहले से चल रहे अनधिकृत पीजी को लेकर सरकार क्या कदम उठाएगी।
सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार की यह पहल दिल्ली में पीजी व्यवस्था को सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
✍️अरविंद कुमार
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