Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी लगातार युवाओं को अपने साथ जोड़ने और Gen Z के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।✍️अरविंद कुमार
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Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी लगातार युवाओं को अपने साथ जोड़ने और Gen Z के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर विवाद को लेकर स्वतंत्र भारद्वाज के बयान ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सवाल है। क्या इस बयान से युवाओं का गुस्सा बीजेपी के खिलाफ और बढ़ सकता है?
स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने बयान में दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा के साथ केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का भी नाम लिया और आरोपों को लेकर सवाल खड़े किए। इसके बाद राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल उठने लगा है कि क्या स्वतंत्र भारद्वाज का बयान बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है? खासकर तब, जब युवा मतदाताओं को लेकर बीजेपी लगातार अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटी है।
दरअसल, जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान एक समर्थक के पिता संजय जी के साथ मारपीट और सिर में गंभीर चोट लगने के आरोपों को लेकर CJP प्रवक्ता सौरव दास, सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत कई नेता संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। CJP नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस से आरोपियों की गिरफ्तारी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की मांग के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
CJP का आरोप है कि पुलिस ने कथित तौर पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई नहीं की। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्वतंत्र भारद्वाज के बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में Gen Z के गुस्से को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अब बड़ा सवाल यही है- क्या स्वतंत्र भारद्वाज का बयान बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है? क्या जंतर-मंतर विवाद युवाओं के बीच बीजेपी के खिलाफ नया राजनीतिक मुद्दा बन सकता है?
✍️अरविंद कुमार
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