नई दिल्ली। कपल्स के रिश्ते में सबसे जरूरी बात क्या है, ये पूछने पर दुनिया-जहान के जवाब मिल जाएंगे, लेकिन नींद का जिक्र शायद ही कोई करेगा। जोड़े एक बेडरूम में रहते हैं। रातभर उनमें से एक खर्राटे लेता है, या कोई दूसरा रातभर लैपटॉप ठकठकाता रहता है। ऐसे में नींद पूरी नहीं हो पाती।
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नतीजा! अगली सुबह मामूली बात परखिटपिट हो जाती है। अब इसी झगड़े को टालने के लिए स्लीप डिवोर्स का चलन बढ़ा है। टिकटॉक पर एक हैशटैग चल रहा है- sleepdivorce, जिसे साढ़े 3 लाख से ज्यादा बार देखा जा सकता हैं।
स्लीप डिवोर्स टर्म भले ही सुनाई देने में नया है, लेकिन इसका चलन काफी पुराना है. साल 1850 से अगले लगभग 100 वर्षों तक पति-पत्नी एक कमरे में तो होते थे, लेकिन होटलों की तर्ज पर वहां ट्विन-शेयरिंग बेड हुआ करते, यानी एक रूम में दो बिस्तर। ये इसलिए था कि अलग-अलग तरह के काम निपटाकर अलग समय पर कमरे में आए लोग एक-दूसरे को डिस्टर्ब किए बिना आराम से सो सकें।