14 फरवरी भारत के लिए कोई सामान्य तारीख नहीं है। यह वह दिन है जब पूरा देश एक साथ शोक, आक्रोश और संकल्प में खड़ा दिखाई देता है। जिस तारीख को दुनिया के कई हिस्सों में प्रेम दिवस के रूप में मनाया जाता है, उसी दिन भारत ने अपने वीर जवानों को एक कायरतापूर्ण आतंकी हमले में खोया।
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14 फरवरी भारत के लिए कोई सामान्य तारीख नहीं है। यह वह दिन है जब पूरा देश एक साथ शोक, आक्रोश और संकल्प में खड़ा दिखाई देता है। जिस तारीख को दुनिया के कई हिस्सों में प्रेम दिवस के रूप में मनाया जाता है, उसी दिन भारत ने अपने वीर जवानों को एक कायरतापूर्ण आतंकी हमले में खोया।
इसी कारण 14 फरवरी को भारत में ‘ब्लैक डे’ के रूप में याद किया जाता है।
14 फरवरी 2019 की दोपहर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा ज़िले में CRPF जवानों का एक काफ़िला राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजर रहा था। इसी दौरान एक आत्मघाती आतंकी ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी काफ़िले की बस से टकरा दी।
विस्फोट इतना भयानक था कि
यह हमला हाल के वर्षों में भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक था।
हमले के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
लेकिन इस दर्द के बीच भारत ने एक बार फिर दिखाया कि आतंक उसे तोड़ नहीं सकता।
शहीद जवान अलग-अलग राज्यों से थे, अलग-अलग परिवारों से लेकिन उनकी पहचान एक थी: देश के रक्षक। उन्होंने वर्दी इसलिए नहीं पहनी थी कि उन्हें तारीफ मिले, बल्कि इसलिए कि देश सुरक्षित रहे। उनका बलिदान हमें याद दिलाता है कि हमारी आज़ादी और सुरक्षा किसी कीमत के बिना नहीं मिली।
14 फरवरी को ब्लैक डे के रूप में याद करना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि:
यह दिन बदले की भावना नहीं, बल्कि स्मृति, सम्मान और संकल्प का प्रतीक है।
14 फरवरी भारत के लिए सिर्फ़ एक तारीख नहीं, यह एक ज़ख्म है, जो समय के साथ भरता नहीं लेकिन हमें मजबूत बनाता है।
शहीद अमर हैं। भारत उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।