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10 सितंबर को शनिवार के भादौ पूर्णिमा के योग में करें विष्णु जी और शनिदेव की पूजा, दोपहर में करें श्राद्ध कर्म

भादौ पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक रोज किए गए जाएंगे पितरों के लिए शुभ कर्म, दोपहर में करना चाहिए धूप-ध्यान

By Ruchi Kumari 
Updated Date

हिंदू पंचांग के अनुसार, शनिवार के दिन भाद्रपद की पूर्णिमा पड़ रही है। ऐसे में इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। बता दें कि भाद्रपद पूर्णिमा को भादौ पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं। इस दिन से पितृ पक्ष की भी शुरुआत हो जाती है।

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शनिवार के साथ पूर्णिमा का योग होने से इस दिन भगवान विष्णु के साथ शनिदेव की पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही आज के दिन हनुमान जी की पूजा करना भी श्रेष्ठ साबित होगा। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सुबह भगवान सूर्य को जल अर्पित करने के साथ करें। जानिए भादौ पूर्णिमा के दिन कौन से काम करना होगा शुभ।
पूर्णिमा पर कर सकते हैं ये शुभ काम

पूर्णिमा पर चंद्र अपनी सभी कलाओं के साथ दिखाई देता है. इस तिथि को भी पर्व माना जाता है. पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान करने की और दान-पुण्य करने की परंपरा है. इस कारण देशभर की सभी पौराणिक महत्व की नदियों में स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.अगर नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो अपने घर पर पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं. स्नान करते समय सभी पवित्र नदियों के नामों का जप करना चाहिए.घर में पूजा-पाठ करने के बाद किसी मंदिर में दर्शन करने जरूर जाना चाहिए. शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं.
ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें.
बिल्व पत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें.
हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का या सुंदरकांड का पाठ करें.
ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जप करें.
पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ने-सुनने का महत्व है. सत्यनारायण जी पूजा करें.
पितृ पक्ष की महत्वपू्र्ण तिथि
10 सितंबर को प्रौष्ठपदी का श्राद्ध होगा. पितृ पक्ष 11 सितंबर से 25 सितंबर तक रहेगा. पंचाग भेद होने से इस बार द्वितीया और तृतीया तिथि का श्राद्ध 12 सितंबर को एक ही दिन में रहेगा.16 सितंबर को श्राद्ध की कोई तिथि नहीं रहेगी. तृतीया तिथि का श्राद्ध 12 सितंबर को होने से चतुर्थी 13 को, पंचमी 14 को, षष्ठी का श्राद्ध 15 तारीख को रहेगा। 16 सितंबर को भी पूरे दिन षष्ठी तिथि रहेगी. इसलिए सप्तमी का श्राद्ध 16 तारीख को छोड़कर 17 सितंबर को किया जाएगा.

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