अभिषेक ने कहा कि अरुण जेटली स्टेडियम में यह उपलब्धि हासिल करना एक अहम पड़ाव है। उन्होंने अपनी इस तूफानी पारी का श्रेय टीम के निडर माहौल को दिया, जिसने उन्हें आक्रामक खेलने के लिए प्रेरित किया। अभिषेक ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 34 गेंदों में 108 रनों की दमदार पारी खेली, जिसके बूते भारतीय टीम 7 विकेट खोकर 221 रन स्कोरबोर्ड पर लगाने में सफल रही। इस लक्ष्य का पीछा करते हुए अफगानिस्तान की पूरी टीम सिर्फ 94 रनों पर ढेर हुई।
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शुक्रवार को ‘बीसीसीआई टीवी’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में अभिषेक ने कहा, “यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, बल्कि शायद सभी भारतीयों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मुझे आज भी याद है कि रोहित जिस तरह से टी20 क्रिकेट खेलते थे, उन्हें घर पर देखना मुझे बहुत पसंद था और उसका मजा आता था। उस रिकॉर्ड को तोड़ना अभी के लिए मेरी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।”
हेड कोच गौतम गंभीर और टी20 इंटरनेशनल कप्तान श्रेयस अय्यर से मिले मजबूत समर्थन का जिक्र करते हुए अभिषेक ने कहा कि आयरलैंड और इंग्लैंड में मिली हार जैसी छोटी-मोटी नाकामियों ने पिछले दो वर्षों में तैयार की गई बल्लेबाजी यूनिट की आक्रामक रणनीति को कमजोर नहीं किया। “मैंने पहले दिन भी कहा था, जब मुझे ‘मैन ऑफ द मैच’ का अवॉर्ड मिला था कि वर्ल्ड कप से पहले के दो वर्षों में हमने दबदबा बनाए रखा था और शायद वर्ल्ड कप के ठीक बाद भी, एक-दो सीरीज हमारी बैटिंग और हमारे खेलने के तरीके को तय नहीं कर सकतीं।”
बाएं हाथ के बल्लेबाज ने आगे कहा, “एक बल्लेबाज के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि हम फिर से वैसा माहौल बनाएं, जहां हमें खुलकर खेलने और खुद को जाहिर करने की आजादी हो। कोच और कप्तान का भी बड़ा रोल है क्योंकि जब वे आपके साथ होते हैं तो मुझे लगता है कि इससे आपको अधिक आजादी और आत्मविश्वास मिलता है।”
अभिषेक ने आगे बताया कि गंभीर ने उन्हें साफतौर पर कहा था कि वे शुरू से ही तेज खेलने वाली सोच को आगे बढ़ाएं और मैच से पहले टीम की मीटिंग में पंजाबी में बात करके सबको प्रेरित करें। “मुझे आज भी याद है कि पहले प्रैक्टिस सेशन में हमने बात की थी कि हम कैसे फिर से दबदबा बनाना चाहते हैं और इस प्रोसेस में आपको निडर होना होगा, हमेशा टीम के बारे में सोचना होगा। मुझे याद है जब मैंने शुरुआत की थी और सूर्यकुमार वहां थे, तो वह हमेशा चाहते थे कि मैं पावरप्ले का फायदा उठाऊं, क्योंकि अगर आप देखें तो टी20 गेम ज्यादातर पावरप्ले पर ही निर्भर करता है। तो गौतम गंभीर यही कह रहे थे – वह चाहते थे कि मैं ऐसा माहौल बनाऊं, टीम ड्रेसिंग रूम में ऐसा माहौल हो जहां आप निडर होकर जा सकें, अपनी मर्जी से खेल सकें और खुद को जाहिर कर सकें।” (आईएएनएस)
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