दिल्ली की राजनीति में हलचल मचाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस को उसके ऐतिहासिक मुख्यालय 24, अकबर रोड को खाली करने का नोटिस दिया गया है- वह भी तय समय सीमा के साथ।
Updated Date
दिल्ली की राजनीति में हलचल मचाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस को उसके ऐतिहासिक मुख्यालय 24, अकबर रोड को खाली करने का नोटिस दिया गया है- वह भी तय समय सीमा के साथ।
सरकारी नियमों के तहत जारी इस नोटिस ने अब सियासी विवाद और कानूनी लड़ाई दोनों के संकेत दे दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी को 28 मार्च 2026 तक अपना अकबर रोड स्थित मुख्यालय खाली करने का निर्देश दिया गया है।
यह नोटिस Directorate of Estates द्वारा जारी किया गया है
साथ ही 5, रायसीना रोड स्थित यूथ कांग्रेस ऑफिस को भी खाली करने के लिए कहा गया है
दोनों जगहों को खाली करने के लिए पार्टी को बहुत कम समय दिया गया है
इस फैसले के पीछे मुख्य कारण है सरकारी आवास नियम।
नियमों के अनुसार, कोई भी राजनीतिक दल एक से ज्यादा सरकारी आवंटित संपत्तियां नहीं रख सकता
कांग्रेस पहले ही अपने नए मुख्यालय इंदिरा भवन (Kotla Marg) में शिफ्ट हो चुकी है
इसके बावजूद पार्टी अब तक अकबर रोड ऑफिस का उपयोग कर रही थी
यही वजह है कि अब सरकार ने पुराने परिसर को खाली करने का निर्देश दिया है।
अकबर रोड का यह बंगला सिर्फ एक ऑफिस नहीं, बल्कि कांग्रेस की राजनीति का ऐतिहासिक केंद्र रहा है।
1978 से यह कांग्रेस का मुख्यालय रहा है
करीब 48 साल तक यहीं से पार्टी का संचालन हुआ
कई बड़े राजनीतिक फैसले, चुनावी रणनीतियां और नेतृत्व परिवर्तन यहीं से हुए
इसलिए पार्टी के लिए यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भावनात्मक और ऐतिहासिक विरासत भी है।
कांग्रेस ने इस नोटिस का विरोध किया है और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
वरिष्ठ नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे “illegal” बताया
पार्टी अब इस मामले में कानूनी विकल्प तलाश रही है
संभव है कि कोर्ट में जाकर स्टे (stay) की मांग की जाए
इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं माना जा रहा।
इसे सरकार बनाम विपक्ष के नए टकराव के रूप में देखा जा रहा है
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर सकता है
आगे क्या?
अब सबकी नजर इस बात पर है कि:
एक बात तय है
अकबर रोड का यह पता सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के इतिहास का अहम हिस्सा रहा है… और अब उसी पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा है।