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विश्व गौरैया दिवस 2026: एक नन्ही चिड़िया को बचाने की बड़ी मुहिम

हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। यह दिन उस नन्ही चिड़िया की याद दिलाता है जो कभी हर घर के आँगन में फुदकती थी, लेकिन आज उसकी आवाज़ धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

By HO BUREAU 

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क्यों मनाया जाता है यह दिन?

हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। यह दिन उस नन्ही चिड़िया की याद दिलाता है जो कभी हर घर के आँगन में फुदकती थी, लेकिन आज उसकी आवाज़ धीरे-धीरे कम होती जा रही है। गौरैया की घटती संख्या एक गंभीर पर्यावरणीय चेतावनी है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

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कहाँ से हुई शुरुआत?

इस दिवस की शुरुआत 2010 में भारत की संस्था ‘नेचर फॉरएवर’ ने की थी। भारत से शुरू हुई यह मुहिम अब 50 से अधिक देशों तक फैल चुकी है। दिल्ली में गौरैया को 2012 में राजकीय पक्षी घोषित किया गया था, लेकिन आज यह चिड़िया वहाँ भी मुश्किल से दिखती है।

क्यों घट रही है गौरैया की संख्या?

गौरैया की आबादी में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से कीड़े-मकोड़े कम हो गए हैं जो इनका मुख्य भोजन थे। प्रदूषण और औद्योगीकरण ने इनके श्वसन तंत्र को नुकसान पहुँचाया है। आधुनिक इमारतों में घोंसला बनाने की जगह न होना भी एक बड़ी समस्या है। जलवायु परिवर्तन ने भी इनके प्राकृतिक वातावरण को बुरी तरह प्रभावित किया है।

पारिस्थितिकी में अहम भूमिका

गौरैया देखने में भले छोटी हो, लेकिन पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी भूमिका बहुत बड़ी है। यह कीड़े-मकोड़ों की संख्या नियंत्रित करती है, परागण में मदद करती है और बीज फैलाने का काम भी करती है। शहरी और ग्रामीण दोनों पारिस्थितिकी तंत्रों के स्वास्थ्य के लिए यह चिड़िया अत्यंत ज़रूरी है।

‘सेव द स्पैरो’- एक प्रेरक अभियान

पर्यावरण संरक्षक जगत किंखाबवाला के ‘सेव द स्पैरो’ अभियान को 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन मिला। इसके अलावा राज्यसभा सांसद बृज लाल ने अपने घर में 50 घोंसले बनाकर गौरैयों को संरक्षण दिया। उनकी इस पहल की प्रशंसा खुद पीएम मोदी ने भी की।

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निष्कर्ष

गौरैया सिर्फ एक पक्षी नहीं, हमारी सभ्यता और प्रकृति के बीच के रिश्ते का प्रतीक है। विश्व गौरैया दिवस हमें याद दिलाता है कि विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते हम सचेत रहें। अपने घर में एक छोटा घोंसला लगाना, कीटनाशकों का उपयोग कम करना और बच्चों को इस चिड़िया से परिचित कराना यही छोटे कदम इस नन्हीं जान को बचा सकते हैं।

✍️सपन दास

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