Jammu-Srinagar Highway : जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार को एक वाहन के पलट जाने से उसमें सवार सीमा सुरक्षा बल (BSF) के चार जवान घायल हो गए।
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Jammu-Srinagar Highway : जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार को एक वाहन के पलट जाने से उसमें सवार सीमा सुरक्षा बल (BSF) के चार जवान घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि रामबन जिले के सेरी में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहन के पलट जाने से BSF के चार जवान घायल हुए।
अधिकारियों ने कहा, “यह हादसा उस समय हुआ जब वाहन श्रीनगर से जम्मू की ओर जा रहा था। सेरी के पास चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद वाहन सड़क पर पलट गया।” अधिकारियों ने बताया कि घायल चारों जवानों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
अधिकारियों ने कहा, “जांच शुरू कर दी गई है और हादसे की परिस्थितियों का सत्यापन किया जा रहा है।” जम्मू-कश्मीर में सड़क दुर्घटनाएं मुख्य रूप से मानवीय भूल, चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाकों और खराब होती सड़क संरचना के कारण होती हैं। सुरक्षित गति सीमा से अधिक तेज वाहन चलाना और आक्रामक तरीके से ओवरटेक करना—खासकर ऐसे मोड़ों पर जहां आगे का रास्ता दिखाई नहीं देता—टक्कर के प्रमुख कारण हैं।
वाहन चलाते या सवारी करते समय मोबाइल फोन का लगातार इस्तेमाल प्रतिक्रिया देने की क्षमता को काफी प्रभावित करता है। राजमार्गों और शहर की सड़कों पर निर्धारित लेन से बाहर वाहन चलाना या गलत दिशा में वाहन चलाना भी जम्मू-कश्मीर में सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल है।
पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्र, जैसे रामबन, डोडा और किश्तवाड़ के इलाके, संकरी सड़कों और तीखी ढलानों वाले हैं, जहां वाहन चलाते समय अधिक सावधानी और सटीकता की आवश्यकता होती है। ये भी दुर्घटनाओं के कारणों में शामिल हैं। सड़कों पर गड्ढे, टूटते किनारे और क्रैश बैरियर, रिफ्लेक्टिव मार्कर तथा उचित चेतावनी संकेत जैसी जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी जोखिम को और बढ़ा देती है।
मौसम में बदलाव के दौरान लगातार भूस्खलन, भारी बारिश और बर्फबारी से दृश्यता कम हो जाती है और खतरनाक पहाड़ी सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं। श्रीनगर और जम्मू जैसे शहरों में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो मौजूदा सड़क क्षमता और पार्किंग व्यवस्था की क्षमता से अधिक है। राजमार्गों पर दुर्घटनाओं के बाद आपातकालीन मदद पहुंचने में देरी अक्सर मौतों का कारण बनती है।
प्रमुख राजमार्गों के आसपास मोबाइल नेटवर्क की सीमित कनेक्टिविटी और उन्नत ट्रॉमा केयर सुविधाओं की कमी के कारण दुर्घटना के तुरंत बाद चिकित्सा सहायता मिलने में देरी होती है, जिससे कुल मृत्यु दर बढ़ जाती है। (आईएएनएस)
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