दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक बेहद गंभीर दुर्घटना हुई जब दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा सड़क पर खोदा गया एक बड़ा गड्ढा बिना सुरक्षित चेतावनी और पर्याप्त बैरिकेडिंग के खुला छोड़ दिया गया। इसी गड्ढे में 25 वर्षीय कमल धनयानी नाम के एक युवक का बाइक समेत गिरकर निधन हो गया, जब वह देर रात अपने काम से घर लौट रहा था।
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6 फ़रवरी 2026 की रात पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक बेहद गंभीर दुर्घटना हुई जब दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा सड़क पर खोदा गया एक बड़ा गड्ढा बिना सुरक्षित चेतावनी और पर्याप्त बैरिकेडिंग के खुला छोड़ दिया गया। इसी गड्ढे में 25 वर्षीय कमल धनयानी नाम के एक युवक का बाइक समेत गिरकर निधन हो गया, जब वह देर रात अपने काम से घर लौट रहा था।
यह गड्ढा लगभग 15–20 फुट (करीब 4–6 मीटर) गहरा था और सड़क पर अँधेरी रात में दुर्लभ चेतावनी के कारण लगभग डरावना ट्रैप बन गया था। कमल के परिवार ने बताया कि उन्होंने रात भर उसको तलाशने की कोशिश की और कई पुलिस थानों को सिलसिले में दौड़ा, लेकिन सुबह तक भी उसे ढूंढा नहीं जा सका। इसके बाद सुबह उसके शरीर और बाइक दोनों गड्ढे के तल में मिले।
विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों के अनुसार यह गड्ढा जे़डीबी के पाइपलाइन और सीवेज वर्क के दौरान खोदा गया था, लेकिन उसके आसपास:
जिससे यह खतरनाक गड्ढा मोटरसाइकिल चालकों और राहगीरों के लिए जानलेवा जाल बन गया था।
दिल्ली सरकार ने खुद गड्ढे को लेकर कहा कि शुरुआती स्तर पर ग्रीन मेष और बैरिकेडिंग की व्यवस्था थी, लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि उस रात सुरक्षात्मक इंतज़ाम सही तरीके से काम कर रहे थे या नहीं। इसे शहरी सुरक्षा की बड़ी भूल कहा जा रहा है।
लापरवाही का आरोप और अधिकारियों पर कार्रवाई
घटना के बाद दिल्ली सरकार ने तीन जल बोर्ड इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया है और एक आख़री रिपोर्ट जल्द लाने का आदेश दिया गया है। स्थानीय मंत्री प्रवेश वर्मा और दिल्ली विकास मंत्री आशिष सूद दोनों ने कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद आसपास के कई स्थानीय लोग और राजनीतिज्ञों ने कहा कि DJB को पहले से नक़ल की गई नोएडा के खोदे गड्ढे से हुई मौत से सबक लेना चाहिए था—लेकिन एक बार फिर वही लापरवाही भारी पड़ गई।
यह हादसा अकेला मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में दिल्ली-NCR में कई खुले गड्ढे, मैनहोल, निर्माण स्थल और खोदे हुए हिस्से समय रहते ढँके या सुरक्षित नहीं किए गए, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की जान को जोखिम हुआ। इन घटनाओं ने नगर निगमों और राज्य एजेंसियों पर गंभीर रूप से सुरक्षा मानकों की अनदेखी का संकट उजागर कर दिया है।
इस घटना की गंभीरता सिर्फ एक व्यक्ति की मौत में नहीं है – बल्कि यह दर्शाती है कि:
किसी भी निर्माण योजना या सिविल वर्क में सुरक्षा प्रोटोकॉल को प्राथमिकता देना ज़रूरी होता है—जिसे इस मामले में पूरी तरह से नज़रअंदाज़ किया गया।
परिवार की दर्दनाक दास्तां और सिस्टम की नींद
कमल के परिवार को रात भर उसके लापता होने की गंभीर जानकारी नहीं मिली, जिसके कारण उन्होंने रातभर पुलिस थानों का चक्कर लगाया—कभी यह संकेत नहीं मिला कि कोई गड्ढा उनकी तलाश का कारण होगा। सुबह तक जब उसकी लाश मिली तो यह पिता, माता और भाई-बहनों के लिए दुगुना सदमा बन गया।
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💡 निष्कर्ष—सरकारी लापरवाही मौत बन गई
इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि:
👉 यदि किसी गड्ढे या निर्माण स्थल को रात में खुला छोड़ा जाता है, तुम्हें पहले संकेत और स्थायी सुरक्षा फ़ेंसिंग देना ज़रूरी है।
👉 सार्वजनिक सुरक्षा की प्राथमिकता केवल घोषणा के स्तर पर नहीं, सड़क पर भी लागू होनी चाहिए।
👉 एक युवा की जान जाने से पहले भी सिस्टम चेतावनी और रोकथाम पर ज़ोर दे सकता था।
कमल का निधन सिर्फ एक हादसा नहीं है—यह प्रबंधन, निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही की एक सख़्त याद है। अगर सरकारी एजेंसियाँ समय रहते सुरक्षित बैरिकेडिंग, संकेत और ढँकने की व्यवस्था करतीं, तो यह दर्दनाक घटना टल सकती थी।