कानपुर, 28 फरवरी। वैश्विक महामारी कोरोना की तीसरी लहर धीमी पड़ गई है। तीसरी लहर का वेरिएंट ओमिक्रोन का असर भी कम हो गया है। जिसकी वजह से लोगों के मन से भय निकल चुका है और अर्थव्यवस्था भी पटरी पर चलने लगी। लेकिन इसी बीच कानपुर IIT के शोधकर्ताओं ने जो अध्ययन किया है वो एक बार फिर चौकाने वाला है।
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23 अगस्त के करीब पीक पर रहेगा कोरोना
शोध अध्ययन के मुताबिक कोरोना की चौथी लहर देश में 22 जून से आने वाली है और 23 अगस्त के करीब पीक पर रहेगी। इस लहर का असर 4 महीने तक रहेगा और 22 अक्टूबर के बाद चौथी लहर का असर पूरी तरह से धीमा पड़ जाएगा।
कानपुर IIT ने किया शोध
कानपुर IIT के सांख्यिकी और गणित विभाग के प्रोफेसर शलभ और एसोसिएट प्रोफेसर सुभ्रा शंकर धर के निर्देशन में शोधार्थी सबरा प्रसाद राजेश भाई ने कोविड-19 पर शोध किया है। उन्होंने कोरोना की पहली लहर से लेकर अब तक के कोरोना के वेरिएंट को लेकर अध्ययन किया है। ये अध्ययन गासियन वितरण प्रणाली के आधार पर भी किया गया है और उनका ये शोध मेड आर्किव वेबसाइट पर प्रकाशित भी हुआ है।
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जिंबाब्वे में कोरोना की चौथी लहर शुरू
कानपुर IIT के शोध के मुताबिक कोरोना संक्रमण का पहला मामला दुनिया में पहली बार दिसंबर 2019 में चीन में सामने आया था। इसके बाद सभी देश वायरस के संक्रमण का शिकार होने लगे। जिंबाब्वे और भारत में तीसरी लहर के आंकड़े लगभग एक समान थे। लेकिन अब वर्तमान में जिंबाब्वे में कोरोना की चौथी लहर शुरू हो गई है और वहां पर ये लहर 936 दिन बाद शुरू हुई है।
इन आंकड़ों के मुताबिक ये बात सामने आ रही है कि भारत में 22 जून से कोरोना की चौथी लहर आ सकती है, क्योंकि भारत में प्रारंभिक डाटा 30 जरवरी 2020 को मिले थे। इस तरह 22 जून से भारत में कोरोना की चौथी लहर आएगी और 23 अगस्त के आसपास कोरोना पीक पर होगा। इसके बाद 22 अक्टूबर से इसका प्रभाव कम होने लगेगा, यानि करीब 4 महीने तक कोरोना का असर एक बार फिर भारत में रह सकता है।