भारत में इंटरनेट और डिजिटल लेन-देन के बढ़ते प्रभाव के साथ साइबर अपराध भी भयावह तरीके से बढ़ा है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़ 2021 से 2024 के बीच साइबर अपराधों की संख्या में 400% से अधिक की वृद्धि हुई है — एक चौकाने वाला और भयावह रुझान।
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भारत में इंटरनेट और डिजिटल लेन-देन के बढ़ते प्रभाव के साथ साइबर अपराध भी भयावह तरीके से बढ़ा है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़ 2021 से 2024 के बीच साइबर अपराधों की संख्या में 400% से अधिक की वृद्धि हुई है — एक चौकाने वाला और भयावह रुझान।
बढ़ती डिजिटल पहुँच और स्मार्टफोन उपयोग ने जहां लोगों के काम को आसान बनाया, वहीं साइबर धोखे, फ्रॉड, फिशिंग और साइबर हमलों को भी बढ़ावा दिया है।
घरेलू और ग्रामीण क्षेत्रों में भी साइबर अपराधों का बढ़ना अब राष्ट्रीय चिंताओं में शामिल है। आंकड़ों के अनुसार:
पहले छह महीनों में ही 2025 में 12.47 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
यह संख्या केवल विकासशील क्षेत्रों के डिजिटल उपयोग का परिचायक नहीं है, बल्कि संकेत है कि निगरानी, सुरक्षा और सचेतनता की कमी का फ़ायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं।
साइबर अपराध न सिर्फ़ डेटा या पहचान की चोरी करता है, बल्कि लाखों करोड़ रुपए का आर्थिक नुक़सान भी पहुँचाता है। डिजिटल भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और शीघ्र ऋण स्कैम जैसे मामलों में भारी धनराशि हानि का सामना करना पड़ा है।
जिससे पीड़ितों को भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ा है।
एक अन्य रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2025 में भारत में 265 मिलियन से अधिक साइबर हमले दर्ज किए गए, जिसमें शैक्षिक संस्थान, स्वास्थ्य और विनिर्माण क्षेत्र प्रमुख रूप से प्रभावित रहे।
पहले साइबर अपराध मुख्य रूप से महानगरों तक सीमित थे, लेकिन अब बड़े पैमाने पर छोटे शहर और ग्रामीण इलाकों में भी बढ़े हैं। कई राज्यों जैसे बिहार, गुजरात, ओडिशा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल सुरक्षा और शिक्षा दोनों ही अपर्याप्त हैं.
आज के साइबर अपराध का परिदृश्य अत्यंत परिष्कृत है:
और भी कई नए तरीके साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
इस खतरे का मुकाबला करने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं:
इसके अलावा RBI ने छोटे साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए ₹25,000 तक मुआवज़ा (शील्ड) देने का प्रस्ताव रखा है, ताकि डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर जनता का विश्वास बना रहे।
भारत में साइबर अपराध की रफ़्तार इतनी तेज़ है कि वह इंटरनेट उपयोग और डिजिटलीकरण के विकास को भी चुनौती देने लगा है। केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं, जन जागरूकता, मज़बूत डिजिटल सुरक्षा शिक्षा और सतर्कता भी ज़रूरी है।
आज भारत में डिजिटल अपराध सिर्फ़ किसी एक वर्ग तक सीमित समस्या नहीं रह गया, यह राष्ट्र की वित्तीय सुरक्षा, नागरिक विश्वास और डिजिटल भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। साइबर सुरक्षा आज हर घर की ज़रूरत है, नहीं तो तेज़ी से बढ़ती धोखाधड़ी आपको भी निशाना बना सकती है।*