Goa : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी जोनल ऑफिस ने नशीली दवाओं और साइकोट्रोपिक पदार्थों की संगठित अंतर-राज्यीय और सीमा-पार तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पांच और आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। 18 सितंबर को नॉर्थ गोवा के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (पीएमएलए के तहत स्पेशल कोर्ट) के सामने निहाल वडाक्कनचेरी नाजर, प्रसोध पीके, एल्फिन थॉमस, धीरज मैथ्यूज और निशांत प्रताप के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई।
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आरोपियों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) की धारा 44 और धारा 45 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध करने का आरोप लगाया गया है। इस अपराध को एक्ट की धारा 3 में परिभाषित किया गया है और धारा 4 के तहत इसके लिए सजा का प्रावधान है। यह अतिरिक्त अभियोजन शिकायत 16 मार्च 2026 की मुख्य प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट के सिलसिले में दायर की गई है, जो 13 फरवरी 2025 से जुड़ी है।
मुख्य प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट सात आरोपियों के खिलाफ दायर की गई थी। इसमें नशीले पदार्थों और साइकोट्रोपिक पदार्थों की संगठित अंतर-राज्यीय और सीमा-पार तस्करी के जरिए लगभग 3.96 करोड़ रुपए की अपराध से कमाई होने की बात साबित हुई थी।
ईडी के अनुसार, आगे की जांच में पांच और आरोपियों की पहचान की गई और उन पर मुकदमा चलाया जा रहा है। इन्हें आरोपी नंबर 8 से 12 के तौर पर शामिल किया गया है। उन पर अपराध से हुई कमाई को बनाने, हासिल करने, लेयरिंग, छिपाने और बदलने (जिसमें क्रिप्टोकरेंसी में सीमा-पार कन्वर्जन भी शामिल है) का आरोप है।
ईडी के पणजी जोनल ऑफिस ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की थी। यह जांच नॉर्थ गोवा पुलिस स्टेशन के एंटी-नारकोटिक सेल द्वारा मधुपन सुरेश शशिकला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 20(बी)(ii)(ए) और 22(सी) के तहत 15 अक्टूबर 2024 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।
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जांच में यह साबित हुआ कि मधुपन एसएस ने लगभग 3.96 करोड़ रुपए की अपराध से कमाई की थी। 2016 से नशीले पदार्थों और साइकोट्रोपिक पदार्थों की संगठित अंतर-राज्यीय और सीमा-पार तस्करी के जरिए 3.96 करोड़ रुपए कमाए गए। इस कमाई का एक हिस्सा बैंकिंग चैनलों के जरिए घुमाया गया और दुबई भेजा गया, ताकि इसे क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीजी) में बदला जा सके। बाद में इसका इस्तेमाल डार्क वेब के जरिए नशीले पदार्थ खरीदने के लिए किया गया।
आगे की जांच के दौरान सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, उनसे जुड़े अपराध से हुई कमाई का भी हिसाब लगाया गया। ईडी ने अनाम चरण प्रधान के पास 9,39,250 रुपए और उत्तम चंद के पास 17.48 लाख रुपए की अपराध से हुई कमाई की पहचान की। इसके बाद 16 सितंबर को जारी पीओए के तहत अनाम चरण प्रधान की 9,39,250 रुपए और उत्तम चंद की 17.48 लाख रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया गया।
ईडी ने ड्रग तस्करी नेटवर्क के वित्तीय ढांचे को निशाना बनाकर उन्हें उजागर करने और खत्म करने के अपने संकल्प को दोहराया। यह कार्रवाई ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य का हिस्सा है, जिसका मकसद भारत को नशा मुक्त बनाना है। ईडी ने कहा कि वह अवैध ड्रग व्यापार और मनी लॉन्ड्रिंग से बनाई गई सभी संपत्तियों का पता लगाने, उनकी पहचान करने और उन्हें जब्त करने के अपने संकल्प पर अडिग है। वहीं, ईडी की ओर से आगे की जांच जारी है। (आईएएनएस)
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