Etawah : इटावा – यमुना किनारे बीहड़ की धरती पर बसा इटावा सफारी पार्क आज सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। कभी बीहड़ों और बंजर जमीन के रूप में पहचान रखने वाला यह क्षेत्र आज एशियाई बब्बर शेरों की दहाड़ से गूंज रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और सोर्स के अनुसार इटावा सफारी पार्क की कहानी करीब 140 साल पुरानी ऐतिहासिक फिशर फॉरेस्ट से शुरू होती है।
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वर्ष 1884 में तत्कालीन जिला कलेक्टर जे.एफ. फिशर ने मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए बंजर भूमि पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कराया। धीरे-धीरे यह क्षेत्र घने जंगल में तब्दील हो गया और फिशर फॉरेस्ट के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसी ऐतिहासिक वन क्षेत्र के लगभग 350 हेक्टेयर हिस्से पर आधुनिक इटावा सफारी पार्क का निर्माण किया गया।
इस परियोजना की परिकल्पना वर्ष 2005-06 में उसे समय के मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की सरकार में की गई थी और मई 2012 में अखिलेश यादव की सरकार में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। यह सफारी पार्क सपा संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव प्रमुख महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव सहित सैफई परिवार के अन्य सदस्य समय-समय पर सफारी पार्क का भ्रमण करने पहुंचते हैं। स्पेन की प्रसिद्ध आर्किटेक्चर कंपनी आर्ट उर्बा ने इसका डिजाइन तैयार किया, जबकि योजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वरूप देने के लिए अधिकारियों ने इंग्लैंड के प्रसिद्ध लॉन्गलीत सफारी पार्क का भी अध्ययन
बीहड़ों से बना विश्वस्तरीय सफारी पार्क
निर्माण के समय सबसे बड़ी चुनौती यहां का बीहड़ और ऊबड़-खाबड़ भूभाग था। हजारों टीलों और गहरी खाइयों वाले क्षेत्र को बिना पेड़ों को नुकसान पहुंचाए प्राकृतिक वन्यजीव आवास के रूप में विकसित किया गया।
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शुरुआत में यह परियोजना केवल एशियाई बब्बर शेरों के प्रजनन केंद्र यानी लायन सफारी के रूप में बनाई गई थी, लेकिन बाद में इसका विस्तार कर डियर सफारी, लेपर्ड सफारी, बियर सफारी और एंटीलोप सफारी को भी शामिल किया गया। इसी के साथ इसका नाम लायन सफारी इटावा से बदलकर इटावा सफारी पार्क कर दिया गया।
लायन सफारी के निदेशक डॉक्टर अनिल कुमार पटेल द्वारा बताया गया कि इटावा सफारी पार्क गुजरात के गिर जंगलों के बाद एशियाई बब्बर शेरों का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। पार्क में वर्तमान में 22 एशियाई बब्बर शेर मौजूद हैं, जिनमें से 17 का जन्म यहीं हुआ है। सिंबा, सुल्तान और बाहुबली जैसे चर्चित शेर यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। शेरों के सफल प्रजनन ने इटावा सफारी पार्क को देश के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में शामिल कर दिया है।
शेरों के अलावा पार्क में बड़ी संख्या में अन्य वन्यजीव भी मौजूद हैं। काला हिरण – 174, चीतल – 147, लेपर्ड – 25, सांभर – 20, भालू – 6, बारहसिंगा – 5, नीलगाय – 2 प्राकृतिक वातावरण में इन वन्यजीवों को देखने का अनुभव पर्यटकों को बेहद रोमांचित करता है।
24 नवंबर 2019 को आम जनता के लिए खोले गए इस पार्क में पिछले पांच वर्षों में 5 लाख से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। इसका उद्घाटन वन एवं पर्यावरण मंत्री दारा सिंह चौहान द्वारा किया गया था। साल 2021-22 में जहां 82 हजार 423 पर्यटक आए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 32 हजार 688 तक पहुंच गई है। इस वर्ष पार्क को गेट फीस से लगभग 2 करोड़ 32 लाख रुपये की आय हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 37 लाख रुपये अधिक है।
सफारी पार्क लगभग 80 करोड़ रुपये के कार्पस फंड के ब्याज और टिकटों से होने वाली आय के जरिए बिना किसी आर्थिक घाटे के सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इसी बचत से हाल ही में पर्यटकों के लिए तीन नई एसी बसें खरीदी गई हैं तथा बच्चों के लिए मनोरंजन सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।
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इटावा सफारी पार्क का भव्य प्रवेश द्वार एक स्पेनिश आर्किटेक्ट द्वारा डिजाइन किया गया है। रेल मार्ग से आने वाले पर्यटकों के लिए इटावा जंक्शन सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। सड़क मार्ग से यह पार्क राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ा हुआ है।
जबकि हवाई यात्रा करने वाले पर्यटक कानपुर और आगरा एयरपोर्ट का उपयोग कर सकते हैं।
इटावा सफारी पार्क अब अपने विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पार्क प्रशासन टाइगर सफारी विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है, जिससे यह देश के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव पर्यटन केंद्रों में और मजबूत पहचान बना सकेगा।
बीहड़ों की धरती से शुरू हुई यह यात्रा आज वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की एक बड़ी मिसाल बन चुकी है। एशियाई बब्बर शेरों की दहाड़, प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इटावा सफारी पार्क आने वाले वर्षों में पर्यटन के नए कीर्तिमान स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है।
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