INDIA bloc : चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट की SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी INDIA ब्लॉक ने अब राजनीतिक लड़ाई को बड़े आंदोलन में बदलने की रणनीति तैयार कर ली है।✍️अरविंद कुमार
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INDIA bloc : चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट की SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी INDIA ब्लॉक ने अब राजनीतिक लड़ाई को बड़े आंदोलन में बदलने की रणनीति तैयार कर ली है। दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक में करीब 20 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया।
बैठक में उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन ऑनलाइन जुड़े। बैठक का मुख्य फोकस चुनाव आयोग, SIR और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर साझा विपक्षी रणनीति पर रहा। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने INDIA ब्लॉक के संयुक्त कार्यक्रमों का ऐलान किया।
INDIA ब्लॉक ने तय किया है कि अब चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को केवल संसद या अदालत तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक राजनीतिक आंदोलन का रूप दिया जाएगा। खरगे के मुताबिक 2 से 8 अक्टूबर के बीच देशभर में ‘Save Democracy March’ निकाला जाएगा। जिला स्तर के इन मार्च में विपक्षी दलों के साथ NGOs, लोकतंत्र और संविधान में आस्था रखने वाले संगठनों तथा अन्य लोगों को जोड़ने की योजना है।

यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब विपक्ष लगातार SIR और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ गठबंधन इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
विपक्ष की रणनीति का अगला बड़ा पड़ाव 6 अक्टूबर होगा। INDIA ब्लॉक के सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। खरगे ने कहा कि इसमें लोकसभा और राज्यसभा के उन सांसदों को भी शामिल होने का आह्वान किया जाएगा, जो लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर इस अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं। यानी विपक्ष अब चुनाव आयोग पर राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव दोनों बढ़ाने की तैयारी में है।
अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में INDIA ब्लॉक के नेता राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगेंगे। विपक्षी नेता चुनाव प्रक्रिया, SIR और संविधान से जुड़े अपने सवालों को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेंगे।
इसके साथ ही विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में SIR और चुनाव से जुड़े लंबित मामलों की जल्द सुनवाई की अपील करने का भी फैसला किया है। यानी सड़क के आंदोलन के साथ संवैधानिक संस्थाओं के सामने भी अपनी बात रखने की रणनीति बनाई गई है।
INDIA ब्लॉक अक्टूबर-नवंबर के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच बड़ी रैलियां करेगा। इनकी तारीख और स्थान बाद में घोषित किए जाएंगे। इसके अलावा नवंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली में एक बड़ी रैली होगी। इस रैली में ‘वोट चोरी’, SIR और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विपक्ष के आरोपों को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा।
इस तरह देखें तो INDIA ब्लॉक ने आंदोलन को छह स्तरों पर आगे बढ़ाने का रोडमैप बनाया है,जिला स्तर के मार्च, चुनाव आयोग तक सांसदों का मार्च, राष्ट्रपति से मुलाकात, पांच राष्ट्रीय स्तर की रैलियां, दिल्ली की बड़ी रैली और अदालतों में लंबित मामलों की जल्द सुनवाई की मांग।
बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा कि सभी विपक्षी दलों के बीच ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर व्यापक सहमति है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला किया है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा और जिन लोगों को वह लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार मानते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विपक्षी नेताओं को संविधान का ‘सामूहिक रक्षक’ बताते हुए आने वाले महीनों में मिलकर काम करने की बात कही।
राहुल गांधी के ये आरोप राजनीतिक दावे हैं। बीजेपी और चुनाव आयोग विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं और चुनाव प्रक्रिया तथा SIR को लेकर अपनी सफाई दे चुके हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक के बाद INDIA ब्लॉक की एकजुटता पर जोर दिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने EVM, वोटों की गिनती और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
ममता ने कहा कि अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने छात्रों, युवाओं, महिलाओं, NGOs और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों से INDIA ब्लॉक के आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों में चुनाव आयोग को लेकर BJP और विपक्ष के बीच टकराव तेज हुआ है। विपक्ष SIR और वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि BJP विपक्ष पर चुनावी हार की निराशा में संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगा रही है। BJP नेताओं ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।
ऐसे में INDIA ब्लॉक की बैठक को सिर्फ एक विपक्षी बैठक के तौर पर नहीं, बल्कि आने वाले महीनों के लिए साझा राजनीतिक अभियान की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है। अब 2 अक्टूबर से शुरू होने वाला ‘Save Democracy March’ बताएगा कि विपक्ष की यह एकजुटता जमीन पर किस तरह दिखाई देती है।
✍️अरविंद कुमार
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