झारखंड, 26 जुलाई 2022। JMM Statement on BJP MLA’s: झारखंड में आए दिन कुछ न कुछ सियासी घटनाएं घटती ही रहती है। दरअसल इस बार झारखंड मुक्ति मोर्चा ने ये दावा किया है कि राज्य में भाजपा के 16 विधायक का गुट उनके संपर्क में हैं और ये सभी राज्य की मौजूदा सरकार को अपना समर्थन देने के लिए तैयार है। वहीं विपक्षी दल भाजपा ने इस दावे को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा समाप्ति की ओर अग्रसर है। झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भाजपा के 16 विधायक प्रदेश पार्टी के नेतृत्व से परेशान हैं। इसके साथ ही वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने को तैयार हैं जबकि दूसरी ओर जेएमएम भी भाजपा के नेतृत्व से परेशान विधायकों का पार्टी में स्वागत करने को तैयार हैं।
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जेएमएम में एकजुटता
सुप्रियो भट्टाचार्य ने जेएमएम में विधायकों की नाराजगी के विषय पर जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी तरह की कलह नहीं है, सभी विधायक एक साथ हैं। बीते दिनों हुए राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी ने जिस उम्मीदवार को समर्थन दिया था पार्टी के सभी 30 विधायकों ने उन्हें ही वोट देकर इसका प्रमाण भी दिया है।
भाजपा से प्रतुल शाहदेव ने किया पलटवार
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की बुनियाद ही झूठ पर टिकी है। बीते दिनों खुद इनकी पार्टी के ही विधायक सीता सोरेन व लोबिन हेंब्रम ने अपनी ही पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। जबकि सरकार के पास उनके आरोपों का कोई जवाब नहीं है। जेएमएम खत्म होने की कगार पर है, उनको भाजपा के विधायकों की चिंता की आवश्यकता नहीं है।
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सीता सोरेन जी, लोबिन हेंब्रम जी ने सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर मुद्दे उठाएं।सरकार पहले उनका जवाब दें।यह अजीब स्थिति है कि इस सरकार में सत्ताधारी दल के विधायकों की नहीं सुनी जाती।लेकिन बिचौलिए सरकार पर हावी दिखते हैं। यही है अबुआ राज की असली कहानी।विधायक हल्के,बिचौलिए भारी।
— Pratul Shah Deo
(@pratulshahdeo) July 25, 2022
झारखंड की राजनीतिक समीकरण में हो रहा बदलाव
आपको बता दें कि बीते माह झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने दिल्ली जाकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस लंबी बैठक के बाद जब सीएम हेमंत सोरेन रांची लौटे तो भाजपा व जेएमएम के बीच की रिश्तों के बीच की कड़वाहट कम दिखाई दी। पहले भाजपा झारखंड सरकार पर लगातार हमलावर थी, जबकि अब सियासी समीकरण बदले-बदले नजर आ रहे हैं।