हरियाणा, 27 जनवरी। लाला लाजपत राय की जयंती से एक दिन पूर्व 27 जनवरी को डॉ. बीआर अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, सोनीपत में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति विनय कपूर मेहरा ने कहा कि हरियाणा लाला लाजपतराय जी की कर्मभूमि रहा है। देश आज उनको नमन करता है और युवाओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
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विश्वविद्यालय की कुलपति विनय कूपर मेहरा ने इस अवसर पर लाला लाजपत राय के स्वतंत्रता संग्राम के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि लाला जी की जंयती पर हमें उनके आदर्शों को आत्मसात करना चाहिए।
लाला लाजपत राय ने महिलाओं की शिक्षा पर दिया था जोर
भारतीय स्त्रियों के प्रति लाला जी के मन में एक विशेष सम्मान, संवेदना व चिन्ता थी। उनका यह मानना था कि भारतीय समाज में औरतें भारतीय सभ्यता, संस्कृति, आर्दशों व मूल्यों कि संरक्षक हैं। भारतीय समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भण्डार हैं।
20वीं शताब्दी के शुरू तक भारतीय समाज में स्त्रियों की दशा से विशेष रूप से चिंतित थे। यह वह समय था जब उनकी स्थिती अत्यंत दयनीय थी। बाल विवाह का प्रचलन था। 1891 के विवाह सम्बन्धी कानून द्वारा लड़कियों की विवाह के लिए न्यूनतम आयु 10 वर्ष से बढ़ा कर 12 वर्ष की गयी थी।
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स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए लाला जी ने सर्वप्रथम स्त्री शिक्षा पर बल दिया। अपनी पुस्तक The Problem of National Education in India में न सिर्फ उन्होंने स्त्री शिक्षा बल्कि सह-शिक्षा का भी भरपूर समर्थन किया।
इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि सभी को लाला जी की विचारधारा को अपनाना चाहिए और समाज की बुराइयों को दूर करने के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए।