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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शपथ लेते ही सदन में गुंजा ‘NEET…NEET…NEET

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18वीं लोकसभा के पहले सत्र का आज पहला दिन है। प्रोटेम स्पीकर की शपथ के बाद 10 बजकर 30 मिनट पर सदन की कार्रवाई शुरू हुई।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शपथ लेते ही सदन में गुंजा ‘NEET…NEET…NEET
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शपथ लेते ही सदन में गुंजा ‘NEET…NEET…NEET
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दिल्ली। 18वीं लोकसभा के पहले सत्र का आज पहला दिन है। प्रोटेम स्पीकर की शपथ के बाद 10 बजकर 30 मिनट पर सदन की कार्रवाई शुरू हुई। सबसे पहले सांसदों की शपथ का कार्यक्रम शुरू हुआ। पीएम मोदी ने सदन के नेता के तौर पर सबसे पहले शपथ लेने पहुंचे। इसके बाद राजनाथ सिंह, अमित शाह और अन्य केंद्रीय मंत्री एक-एक शपथ लेने पहुंचे। जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शपथ के लिए पहुंचे तो विपक्ष ने नीट, नीट, नीट और शेम शेम शेम बोलते हुए नारेबाजी की। सभी विपक्षी सांसदों ने उनका जमकर विरोध किया।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उनका जमकर विरोध किया। बता दें कि शिक्षा मंत्री ने उड़िया में शपथ ली। नीट पेपर लीक 2024 को लेकर विपक्ष इन दिनों बीजेपी और पीएम मोदी पर जमकर निशाना साध रहा हैं। हालांकि सरकार ने डैमेज कंट्रोल के लिए एंटी पेपर लीक कानून को नोटिफाई कर दिया है। इस बीच मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। सीबीआई की दो टीमें पटना और गोधरा पहुंच चुकी है। कुल मिलाकर नीट पेपर लीक मामले में किरकिरी कराने वाले एनटीए की भी सरकार समीक्षा कर रही है।

संविधान की काॅपी लेकर पहुंचे विपक्षी सांसद

इससे पहले विपक्ष के सभी सांसदों ने हाथों में संविधान की काॅपी लेकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार पहले दिन से ही अहंकार में डूबी हुई है। ऐसे में हमें पहले दिन से ही संविधान की रक्षा करनी है। बता दें कि सासंदों के शपथ के बाद लोकसभा स्पीकर का चुनाव होना है। इसके बाद राष्ट्रपति का अभिभाषण होगा। फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेगी। बजट पर सदन में चर्चा के बाद आखिरी दिन पीएम मोदी दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देंगे। 3 जुलाई को यह पहला सत्र खत्म हो जाएगा।

प्रोटेम स्पीकर को लेकर हुआ विवाद

बता दें कि प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति को लेकर भी विवाद हो चुका है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से सत्र शुरू होने से पहले कहा कि यह सरकार अभी भी अहंकार में डूबी हुई है। प्रोटेम स्पीकर के तौर पर अगर सरकार किसी विपक्षी सांसद को नियुक्त करती है तो परंपरा का पालन होता। उन्होंने आगे कहा कि भर्तुहरि महताब 7वीं बार के सांसद हैं। जबकि के. सुरेश लगातार 8वीं बार सांसद बने हैं।

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