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Noida School Fee Hike Row: DM के आदेश के बावजूद क्यों बढ़ रही फीस?

नोएडा में स्कूल फीस को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में जिला प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इस सत्र में फीस बढ़ोतरी की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद अभिभावकों की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही।

By HO BUREAU 

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नोएडा में स्कूल फीस को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में जिला प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इस सत्र में फीस बढ़ोतरी की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद अभिभावकों की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही। उनका कहना है कि हर साल किसी न किसी रूप में फीस बढ़ जाती है, लेकिन इसके पीछे की वजह कभी साफ नहीं की जाती।

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जिला अधिकारी (डीएम) के बयान के बाद उम्मीद जगी थी कि इस बार अभिभावकों को राहत मिलेगी। लेकिन कई निजी स्कूलों द्वारा अलग-अलग हेड के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेने की खबरें सामने आ रही हैं। कभी “एक्टिविटी फीस”, कभी “मेंटेनेंस चार्ज” तो कभी “डेवलपमेंट फीस” के नाम पर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रशासन पारदर्शिता नहीं बरतता। उन्हें यह नहीं बताया जाता कि फीस बढ़ाने की असली जरूरत क्या है और वह पैसा कहां खर्च हो रहा है। कई माता-पिता ने यह भी आरोप लगाया कि अगर वे फीस को लेकर सवाल उठाते हैं, तो बच्चों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जाता है, जिससे वे खुलकर विरोध नहीं कर पाते।

वहीं, स्कूल प्रबंधन का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई, शिक्षकों की सैलरी, और आधुनिक सुविधाओं को बनाए रखने के लिए खर्च बढ़ रहा है। हालांकि, अभिभावकों का तर्क है कि अगर खर्च बढ़ रहा है, तो उसका पूरा ब्योरा भी सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि फीस बढ़ोतरी जायज है या नहीं।

इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका अहम हो जाती है। डीएम के सख्त निर्देश के बावजूद अगर स्कूल फीस बढ़ाने के रास्ते ढूंढ रहे हैं, तो यह नियमों की अनदेखी मानी जाएगी। अभिभावकों की मांग है कि प्रशासन नियमित रूप से स्कूलों की फीस संरचना की जांच करे और उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे।

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अंततः, यह मुद्दा केवल फीस का नहीं, बल्कि भरोसे का भी है। जब तक स्कूल और अभिभावकों के बीच पारदर्शिता और संवाद नहीं बढ़ेगा, तब तक हर साल यही विवाद सामने आता रहेगा। ऐसे में जरूरी है कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा के रूप में देखा जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके और अभिभावकों की चिंताएं भी दूर हो सकें।

✍️सपन दास 

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