UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश का नाम सुनकर उद्योगपति यहां आने से कतराते थे। निवेशकों को लखनऊ बुलाना तक मुश्किल था।
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UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश का नाम सुनकर उद्योगपति यहां आने से कतराते थे। निवेशकों को लखनऊ बुलाना तक मुश्किल था। हालत यह थी कि वर्ष 2015-16 में उत्तर प्रदेश के लिए आयोजित होने वाली इन्वेस्टर्स समिट दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में करानी पड़ी थी। निवेश यूपी में होना था, लेकिन निवेशकों को बुलाने के लिए दिल्ली का सहारा लेना पड़ा।
CM योगी ने सोमवार को राजधानी में आयोजित जीसीसी इनोवेशन समिट-2026 में प्रदेश के उस दौर को याद करते हुए कहा कि आज तस्वीर बदल चुकी है। उत्तर प्रदेश में 50 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इनमें 15 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है, जबकि साढ़े सात लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने के लिए तैयार हैं।
लखनऊ के द सेंट्रम में आयोजित समिट में सीएम योगी ने कहा कि दस साल पहले कोई कहता कि लखनऊ में जीसीसी इनोवेशन समिट होगी तो शायद यहां मौजूद उद्योग जगत के प्रतिनिधियों में से कोई आने को तैयार नहीं होता। उस समय लखनऊ की पहचान निवेश के अनुकूल शहर के रूप में नहीं थी। निवेशकों के मन में यहां की कानून व्यवस्था को लेकर आशंकाएं थीं। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ही सुरक्षित नहीं होगा तो उसकी पूंजी कैसे सुरक्षित रहेगी। यही वजह थी कि निवेशक उत्तर प्रदेश आने से बचते थे।
उन्होंने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश की पहचान उपद्रव, अराजकता और माफिया प्रवृत्ति के तत्वों के वर्चस्व से होती थी। राज्य पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार था। अकर्मण्यता और अव्यवस्था ने देश के सबसे युवा राज्य को बीमारू राज्यों की श्रेणी में पहुंचा दिया था। उत्तर प्रदेश अपनी पहचान खो चुका था।
सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश निवेश और तकनीक आधारित उद्योगों के लिए नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी ने वर्ष 2015-16 के इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय की सरकार ने उद्योग जगत के प्रमुख लोगों को लखनऊ आने का निमंत्रण दिया था, लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया। निवेशकों का कहना था कि लखनऊ के बारे में उन्होंने बहुत खतरनाक शहर के रूप में सुना है। इसके बाद तत्कालीन सरकार को दिल्ली के फाइव स्टार होटल में समिट आयोजित करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि निवेश का स्थान उत्तर प्रदेश था, लेकिन आयोजन दिल्ली में हो रहा था। ऐसे में निवेश के जो परिणाम सामने आए, वे किसी से छिपे नहीं हैं। निवेश के लिए केवल नीतियां घोषित करना पर्याप्त नहीं होता। निवेशकों को अपनी पूंजी और कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ बेहतर कारोबारी माहौल का भरोसा भी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में निवेश का माहौल बदलने के लिए कानून व्यवस्था, आधारभूत ढांचे और नीतिगत सुधारों पर एक साथ काम किया गया। इसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है। इसके अतिरिक्त साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव ग्राउंड ब्रेकिंग के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसरों में बदलना है। प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए 36 सेक्टोरल नीतियां बनाई गई हैं। निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम हो रहा है। वर्ष 2030-31 तक प्रदेश में 500 नए जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चार करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस विकसित करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि समिट में प्रदर्शित लघु फिल्म में बताया गया कि प्रदेश में पहले से 200 से अधिक जीसीसी, 400 से ज्यादा एसटीपीआई-पंजीकृत आईटी एवं आईटीईएस इकाइयां और 4.3 करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस उपलब्ध है। नोएडा जीसीसी के स्थापित केंद्र के रूप में उभरा है, जबकि लखनऊ में भी इस क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। कानपुर समेत अन्य शहरों में भी संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर वर्ष बड़ी संख्या में तकनीकी स्नातक तैयार हो रहे हैं। सरकार का लक्ष्य छह लाख एसटीईएम स्नातकों की प्रतिभा क्षमता तैयार करना है, ताकि वैश्विक कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। समिट में मुख्यमंत्री योगी ने पांच प्रमुख जीसीसी परियोजनाओं के लिए कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट प्रदान किए। इनमें हैवेल्स, एमरी प्राइस, मेटलाइफ, एलजी और डब्ल्यूएसपी शामिल हैं। इन परियोजनाओं से 6,467 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
इसके साथ ही जीसीसी निवेशकों के साथ 15 एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। इनमें ईवाईजीडीएस, एएमएल राइटसोर्स, कंप्यूटसेंटर, मेटलाइफ, डीएसवी, स्मार्टवर्क्स, डेमैक, एलट्रूस्ट, पेटीएम, एडब्ल्यूएस, बार्कलेज, नौकरी और आईबीएन समेत अन्य कंपनियां शामिल रहीं। तकनीकी प्रतिभा और उद्योग की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल के लिए 13 विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी संस्थानों के साथ भी समझौते किए गए। इनमें आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू, आईआईटी रुड़की, आईआईएम लखनऊ, आईआईआईटी लखनऊ, एकेटीयू, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख संस्थान शामिल हैं।
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रतिनिधि बृजेश शर्मा ने बताया कि कंपनी उत्तर प्रदेश में 634 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इसमें प्रतिभा विकास और अनुसंधान एवं विकास से जुड़े बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जाएगा। परियोजना से 500 से अधिक उच्च-मूल्य वाली नौकरियां सृजित होने की संभावना है। स्मार्टवर्क्स के प्रतिनिधि हर्ष बिनानी ने बताया कि कंपनी नोएडा में 20 लाख वर्ग फीट क्षेत्र का प्रबंधन कर रही है, जहां 110 से अधिक कंपनियां मौजूद हैं। लखनऊ के बीबीडी टाइम्स स्क्वायर में भी दो लाख वर्ग फीट क्षेत्र विकसित किया गया है। उन्होंने प्रदेश में निवेश प्रक्रिया और मिले सहयोग का उल्लेख किया।
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के प्रतिनिधि राजीव कुमार ने नोएडा में कंपनी के विस्तार का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि निवेश के लिए प्रतिभा, सुरक्षा और बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण हैं। नोएडा में माइक्रोसॉफ्ट का केंद्र तीन वर्षों में तीन हजार कर्मचारियों तक पहुंच चुका है। एचसीएल टेक के प्रतिनिधि किरण चेरुकुरी ने बताया कि कंपनी लखनऊ में 12,500 कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। उन्होंने एआई आधारित जीसीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए एडब्ल्यूएस और डीप-टेक नवाचार के लिए आईआईटी कानपुर के साथ सहयोग की जानकारी दी।
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, हवाई संपर्क, मेट्रो, औद्योगिक भूमि और तकनीकी शिक्षा के विस्तार ने निवेश की संभावनाएं बढ़ाई हैं। प्रदेश में 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है। पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू हवाई अड्डों के नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या 120 से बढ़कर लगभग 25 हजार तक पहुंच चुकी है। हर वर्ष करीब दो लाख एसटीईएम स्नातक तैयार हो रहे हैं। इस प्रतिभा को तकनीक आधारित उद्योगों से जोड़ने पर सरकार का विशेष जोर है।
कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जीसीसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी उद्योगों के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में एक हजार से अधिक व्यवसाय अनुकूल सुधार लागू किए गए हैं। (आईएएनएस)
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