जब मई-जून की धूप आसमान से आग बरसाने लगती है और सड़कें तपते तवे जैसी हो जाती हैं, तब भारत के हर कोने में लोग अपने-अपने देसी नुस्खों और पारंपरिक भोजन के सहारे गर्मी से लड़ते हैं।
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जब मई-जून की धूप आसमान से आग बरसाने लगती है और सड़कें तपते तवे जैसी हो जाती हैं, तब भारत के हर कोने में लोग अपने-अपने देसी नुस्खों और पारंपरिक भोजन के सहारे गर्मी से लड़ते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि भारत के अलग-अलग राज्यों में खान-पान अलग जरूर है, लेकिन जड़ एक ही है शरीर को ठंडा रखना, पानी की कमी पूरी करना और लू से बचना।
यही वजह है कि देश के हर इलाके में गर्मियों के लिए कुछ खास पेय और व्यंजन पीढ़ियों से चले आ रहे हैं।
अगर आप गर्मियों में Sattu का नाम नहीं लेते, तो मानिए आपने असली देसी गर्मी का इलाज नहीं जाना।
भुने चने से बनने वाला यह पौष्टिक आटा पानी, नींबू, नमक या गुड़ के साथ घोलकर पिया जाता है।
सड़क किनारे ठेले से लेकर घरों तक, सत्तू का शरबत गर्मी में ऊर्जा, ठंडक और पेट भरने का तीनों काम करता है। यही कारण है कि बिहार, झारखंड और पूर्वी यूपी में इसे “गरीबों का प्रोटीन ड्रिंक” भी कहा जाता है।
जहाँ दिन का तापमान 45 डिग्री पार कर जाता है, वहाँ के लोग सदियों से जानते हैं कि गर्मी से कैसे लड़ना है।
राजस्थान में गर्मियों का असली साथी है Chaas यानी छाछ। नमक, जीरा और पुदीना डालकर बनाई गई छाछ शरीर को तुरंत ठंडक देती है और पाचन भी सुधारती है।
इसके अलावा बाजरे से बनी राबड़ी भी गर्मी में शरीर को संतुलित रखने का पारंपरिक तरीका है।
जब आम का मौसम आता है, तो महाराष्ट्र और गुजरात में हर घर में बनता है Aam Panna।
कच्चे आम को उबालकर उसमें जीरा, काला नमक और गुड़ मिलाकर बनाया गया यह पेय सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि लू से बचाने का सबसे लोकप्रिय घरेलू उपाय माना जाता है।
पुराने समय में लोग धूप में निकलने से पहले एक गिलास आम पन्ना जरूर पीते थे।
उत्तर भारत की गर्मियों में अगर कोई पेय सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है, तो वह है Lassi।
गाढ़ी दही से बनी यह ठंडी लस्सी कभी मीठी तो कभी नमकीन रूप में पी जाती है।
पंजाब के ढाबों में मिट्टी के बड़े गिलास में मिलने वाली लस्सी इतनी गाढ़ी होती है कि लोग मजाक में कहते हैं
“इसे पीने के बाद खाना खाने की जरूरत ही नहीं।”
दक्षिण भारत में गर्मी से बचने के लिए एक अनोखी परंपरा है रात का बचा हुआ चावल पानी में भिगोकर सुबह खाना।
इस व्यंजन को तमिलनाडु में Pazhaya Sadam कहा जाता है।
रातभर पानी में रखने से चावल में हल्की प्राकृतिक किण्वन प्रक्रिया होती है, जिससे यह प्रोबायोटिक और ठंडा भोजन बन जाता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पाचन भी सुधारता है।
पूर्वी भारत में भी इसी तरह का भोजन लोकप्रिय है Panta Bhat।
पानी में भिगोया हुआ चावल, कच्चा प्याज, हरी मिर्च और नमक के साथ खाया जाता है।
साधारण दिखने वाला यह भोजन गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट और ठंडा रखने का बेहद प्रभावी तरीका माना जाता है।
समुद्र तटों वाले दक्षिणी राज्यों में गर्मी से लड़ने का सबसे सरल उपाय है Coconut Water।
केरल में सड़क के किनारे-किनारे नारियल के ठेले गर्मियों में हर जगह दिखाई देते हैं।
प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर यह पेय शरीर को तुरंत तरोताजा कर देता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है।
भारत के हर कोने का स्वाद अलग है
कहीं सत्तू, कहीं लस्सी, कहीं पांत भात, कहीं आम पन्ना।
लेकिन अगर इन सबको गौर से देखें तो एक समानता साफ दिखाई देती है:
यानी सदियों पहले ही भारतीय समाज ने गर्मी से लड़ने का देसी विज्ञान खोज लिया था।
जब सूरज सिर पर आग बरसा रहा होता है, तब भारत का हर राज्य अपने-अपने स्वाद से गर्मी को जवाब देता है।
कहीं मिट्टी के घड़े में ठंडा सत्तू घुल रहा होता है…
कहीं बड़े गिलास में झागदार लस्सी बन रही होती है…
तो कहीं पानी में भीगा चावल सुबह की ठंडी थाली में सज रहा होता है।
गर्मी चाहे कितनी भी तेज क्यों न हो,
भारत की रसोई हमेशा उससे एक कदम आगे रहती है।