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आस्थाः सावन का पहला सोमवार कल, जानें पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

10 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है। सावन माह के प्रत्येक सोमवार शिव भक्तों के लिए सबसे खास माने जाते हैं। इस दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं और विधिपूर्वक पूजा करते हैं। सावन माह का समापन 31 अगस्त को होगा।

By Rajni 

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लखनऊ। सावन का पहला सोमवार 10 जुलाई को है। सावन माह के प्रत्येक सोमवार शिव भक्तों के लिए सबसे खास माने जाते हैं। इस दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं और विधिपूर्वक पूजा करते हैं।

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सावन माह का समापन 31 अगस्त को होगा। हालांकि इस बार सावन के पहले सोमवार को पंचक भी लग रहा है, इसलिए लोगों के मन में पूजा और जलाभिषेक को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं इस दिन पंचक का क्या प्रभाव होगा। पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त क्या है।

पहले सोमवार पर पंचक का साया

सावन में 6 जुलाई को दोपहर O1 बजकर 38 मिनट से पंचक की शुरुआत हो गई थी। जिसका समापन 10 जुलाई को सावन के पहले सोमवार को शाम 6 बजकर 59 मिनट पर होगा। यानि पूरे दिन पंचक का साया रहेगा। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि पंचक गुरुवार से शुरू हुआ था, इसलिए ये हानिकारक नहीं है।

क्या है शुभ मुहूर्त 

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सावन के पहले सोमवार को श्रावण अष्टमी तिथि सुबह से लेकर शाम 06 बजकर 43 मिनट तक है। सुकर्मा योग दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से है, जो पूरी रात रहेगा। वहीं पंचक सुबह 05 बजकर 30 मिनट से शाम 06 बजकर 59 मिनट तक है।

इस दिन का शुभ मुहूर्त या अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक है। जानकारों के अनुसार सावन के पहले सोमवार पर रुद्राभिषेक का संयोग बना है। क्योंकि इस दिन शिववास गौरी के साथ है और जब शिववास होता है, तभी रुद्राभिषेक किया जाता है। इस दिन रुद्राभिषेक का शुभ मुहूर्त प्रात: काल से लेकर शाम 06 बजकर 43 मिनट तक है।

पूजा के लिए चाहिए ये सामग्री

फूल, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगाजल, पवित्र जल, पंच रस, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, कपूर, धूप, दीप, रूई, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी,मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार सामग्री।

सावन के सोमवार की पूजा विधि

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सावन के सोमवार को प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें। साथ ही देवी पार्वती और नंदी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं। इसके बाद पंचामृत से रुद्राभिषेक करें और बेलपत्र अर्पित करें।

शिवलिंग पर धतूरा, भांग, आलू, चंदन, चावल चढ़ाएं। इसके बाद शिव जी के साथ माता पार्वती और गणेश जी को तिलक लगाएं। प्रसाद के रूप में भगवान शिव को घी और शक्कर का भोग लगाएं। अंत में धूप, दीप से भगवान भोलेनाथ की आरती करें और पूरे दिन फलाहार हर कर शिव जी का स्मरण करते रहें।

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