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Ukraine War : संयुक्त राष्ट्र ने चेताया, रूस-यूक्रेन युद्ध से मानव तस्करी का खतरा बढ़ा, तो यमन में हो सकता है भुखमरी का संकट

संयुक्त राष्ट्र ने कहा- यूक्रेन में युद्ध के 21 दिनों में 30 लाख से अधिक लोगों ने छोड़ा यूक्रेन, रूस-यूक्रेन संघर्ष से यमन में हो सकता है भुखमरी का संकट

By इंडिया वॉइस 
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कीव, 16 मार्च। यूक्रेन पर रूसी हमले के 21वें दिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस युद्ध को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने चेताया है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से अन्य संकटों के साथ मानव तस्करी का खतरा भी पैदा हो गया है। साथ ही बीते 21 दिनों में यूक्रेन से पलायन करने वालों की संख्या भी 30 लाख पार कर गयी है।

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बच्चे और महिलाएं मानव तस्करों के चंगुल में फंसने को मजबूर

तमाम अंतरराष्ट्रीय कोशिशों के बावजूद रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार जारी युद्ध के प्रति चिंता जाहिर करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ट्वीट कर कहा है कि मानव तस्करों के लिए यूक्रेन में जारी युद्ध एक आपदा नहीं है। वो इसे अवसर मान रहे हैं, बच्चे और महिलाएं उनके निशाने पर हैं। उन्हें हर कदम पर मदद और सुरक्षा की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाएं यूक्रेन से हो रहे पलायन को लेकर तो चिंतित थी हीं, अब मानव तस्करी का खतरा चिंताजनक स्थितियों में सामने आया है। युद्ध के शुरुआती 21 दिनों में अब तक यूक्रेन छोड़कर जाने वालों की संख्या 30 लाख से अधिक हो चुकी है। ये लोग आसपास के देशों में शरण ले रहे हैं। तमाम बच्चे और महिलाएं मानव तस्करों के चंगुल में फंसने को भी मजबूर हैं।

यूनिसेफ के मुताबिक यूक्रेन में रोज लगभग 75 हजार बच्चे शरणार्थी बन रहे हैं। युद्ध के कारण हर एक मिनट में यूक्रेन के 55 बच्चे शरणार्थी बनने को विवश हैं यानी हर सेकंड औसतन एक बच्चा शरणार्थी बन जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए तुरंत युद्ध रोकने और शरणार्थियों को मानव तस्करों से बचाने के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की गई है।

संयुक्त राष्ट्र संघ- रूस-यूक्रेन संघर्ष से यमन में हो सकता है भुखमरी का संकट

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वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ ने चेताया है कि रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध की मार यमन को भुखमरी के संकट के रूप में झेलनी पड़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र संघ के राहत मामलों के प्रमुख मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने सुरक्षा परिषद को बताया कि यमन युद्ध के 7 साल से अधिक समय के बाद भी लगातार आपातकाल की स्थिति में रह रहा है। वहां पर भूख, बीमारी और अन्य संकट कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक सहायता एजेंसियों के प्रयासों की रफ़्तार की तुलना में यमन के संकट कहीं ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहे हैं। ग्रिफिथ्स ने कहा कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से ये संकट और भयावह दिखने लगा है।

यमन में लगभग दो करोड़ 34 लाख लोगों को सहायता की आवश्यकता

नए राष्ट्रव्यापी आकलन के मुताबिक इस समय यमन में लगभग 02 करोड़ 34 लाख लोगों को सहायता की जरूरत है, यानि हर 4 लोगों में से लगभग तीन लोगों को मदद की दरकार है। उनमें से एक करोड़ 90 लाख ऐसे लोग भी हैं जो आने वाले महीनों में भूखे पेट रहने को मजबूर होंगे। इस संख्या में साल 2021 की तुलना में 20 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जबकि उनमें से लगभग एक करोड़ 60 हज़ार लोग अकाल जैसी स्थितियों का सामना करेंगे।

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि यमन अपनी 90 प्रतिशत भोजन खपत और ईंधन की लगभग 100 प्रतिशत ज़रूरत के लिए वाणिज्यिक आयात पर निर्भर करता है। यमन की ज़रूरत का एक तिहाई गेहूं रूस और यूक्रेन से आता है। वहां युद्ध के कारण इस बार संकट और बढ़ने की उम्मीद है।

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