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Valentine’s Day के अलावा भी क्यों जानना चाहिए 14 फ़रवरी के बारे में, जानिये कई वजहें

तीसरी शताब्दी में रोम के एक शासक ने प्रेम करने वालों पर जुल्म ढाए। वैलेंटाइन नाम के पादरी ने विरोध किया तो उन्हें जेल में डाल दिया गया। फिर 14 फरवरी, 270 को उन्हें फांसी दे दी गयी। इस तरह यह दिन प्रेम के लिए न्योछावर होने वाले संत वैलेंटाइन के नाम हो गया।

By इंडिया वॉइस 
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गांधीवादी मालवीय जी ने क्रांतिकारियों को असाधारण बताया: पिछले कुछ समय से 14 फरवरी वैलेंटाइंस डे के रूप में मनाया जाता है। इसके विपरीत बहुत कम लोग जानते हैं कि यह दिन हमारे देश की आजादी के लिए मातृभूमि के चरणों में बलिदान होने वालों का भी है। ऐसे क्रांतिकारी, जिनके लिए गांधीवादियों ने भी ऊपर तक फरियाद की थी।

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फिलहाल, वैलेंटाइंस डे के लौकिक रूप और उसके विरोध की कहानी, जिसे सभी जानते हैं। फिर भी, लोग यह जानने की कोशिश नहीं करते हैं कि प्रेमियों को कोई दिन चुनने की जरूरत क्यों पड़ी। तीसरी शताब्दी में रोम के एक शासक ने प्रेम करने वालों पर जुल्म ढाए। वैलेंटाइन नाम के पादरी ने विरोध किया तो उन्हें जेल में डाल दिया गया। फिर 14 फरवरी, 270 को उन्हें फांसी दे दी गयी। इस तरह यह दिन प्रेम के लिए न्योछावर होने वाले संत वैलेंटाइन के नाम हो गया।

प्रेम की पराकाष्ठा मातृभूमि के लिए शहीद होने में दिखती रही है। ऐसा ही देशप्रेम भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और बटुकेश्वर दत्त जैसे असंख्य सेनानियों ने किया था। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी थी। उसी समय 14 फरवरी, 1931 को पंडित मदन मोहन मालवीय ने लार्ड इरविन को पत्र लिखा। उन्होंने इंसानियत का वास्ता देकर वायसराय से इन देशभक्तों की सजा माफ किए जाने की अपील की थी।

इसके पहले महात्मा गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस अधिवेशन ने भी फांसी की सजा की निंदा की थी। मालवीय जी ने इरविन को लिखे पत्र में कहा कि ये लोग सामान्य व्यक्ति नहीं हैं। इन्होंने स्वयं अथवा अपने परिवार के लिए कुछ नहीं किया है, जिसके लिए इन्हें फांसी दी जा रही है। विदेशी सत्ता कहां मानने वाली थी। उसने देशभर से की जा रही फरियाद अनसुनी कर दी। आजादी के इन दीवानों को देशभक्ति की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

एक बार फिर सीमा प्रहरियों को बनाया गया निशाना: देश के संवेदनशील राज्य जम्मू-कश्मीर में कुछ बड़ी आतंकवादी घटनाएं हुईं। उन्हीं में से 14 फरवरी, 2019 को सीआरपीएफ जवानों को लक्ष्य बनाने का प्रकरण है। उस दिन पुलवामा जिले में जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे वाहन से सीआरपीएफ जवानों की बस को टक्कर मार दी। इस हमले में कम से कम 39 जवान शहीद हो गये थे। अगले दिन तक यह संख्या 44 हो गयी। उस आतंकी हमले में 40 से अधिक जवान घायल भी हुए थे। इस हमले को लेकर देशभर में गुस्सा, दुख और क्षोभ का वातावरण देखा गया।

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अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं:

1556: पंजाब के कलानौर में मात्र 13 वर्ष की आयु में अकबर को मुगल सम्राट बनाया गया।

1876: अलैक्जैंडर ग्राहम बेल की ओर से टेलिफोन के पेटेंट के लिए आवेदन।

1939: बम्बई (अब मुंबई) में शराबबंदी का प्रस्ताव रखा गया।

1974: रूसी लेखक अलैक्जैंडर सोल्जेंत्सिन को देश निकाले के एक दिन बाद उनपर देशद्रोह का आरोप।

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1989: ईरान के धार्मिक नेता आयतुल्लाह खुमैनी का भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रूश्दी की किताब ‘सेटेनिक वर्सेज’ को ईशनिंदा करार देते हुए रूश्दी के खिलाफ फतवा। जान लेने वाले को इनाम की भी घोषणा।

1990: इंडियन एयरलाइंस के विमान दुर्घटना में 146 सवार लोगों में से 97 की मौत।

2005: स्टीव चेन, चाड हर्ली और जावेद करीम ने विडियो साझा करने के लिए ‘यू ट्यूब’ नाम की वेब साइट को पंजीकृत कराया।

2005: नेपाल में लोकतंत्र को खतरे में बताकर ब्रिटेन और फ्रांस ने अपने राजदूतों को वापस बुलाया।

2005: लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफीक हरीरी की बेरूत में एक कार बम विस्फोट में मौत।

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