Delimitation Bill : परिसीमन संविधान संशोधन बिल को लेकर जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र को लेकर किरेन रिजिजू के जवाब का जिक्र किया।✍️Avinay Mishra
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Delimitation Bill : परिसीमन संविधान संशोधन बिल को लेकर जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र को लेकर किरेन रिजिजू के जवाब का जिक्र किया। कांग्रेस नेता ने मंगलवार को एक्स के जरिए कहा कि ‘कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री को परिसीमन के मुद्दे पर एक लेटर लिखा था। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कल इस पत्र का जवाब दिया। अपने जवाब में किरेन रिजिजू ने मार्च 2026 में परिसीमन को लेकर कुछ राजनीतिक दलों के साथ गृह मंत्री की चुनिंदा चर्चाओं का जिक्र किया है।’
जयराम रमेश ने कहा कि ‘लेटर में इस बात का कोई जिक्र नहीं किया गया है कि गृह मंत्री ने उन चर्चाओं में जो वादे किए थे, वे उस संविधान संशोधन विधेयक में शामिल नहीं थे, जिसे 16 अप्रैल 2026 को लाया गया था। यह विधेयक 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पूरी तरह और निर्णायक रूप से खारिज हो गया था।’
समय-समय पर प्लांटेशन इकॉनमी को बढ़ावा देने की बातें करने के बजाय, किरेन रिजिजू को अब तीन अहम सवालों के जवाब देने चाहिए।
1. क्या मोदी सरकार के पास परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर कोई ठोस नया प्रस्ताव है, जिस पर उसने किसी भी पार्टी के साथ चर्चा की हो?
2. मोदी सरकार परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने, अपना नया प्रस्ताव पारदर्शी तरीके से पेश करने और एक सामूहिक मंच पर सभी दलों के विचार सुनने से क्यों इनकार कर रही है? सभी विपक्षी दलों की लगातार यही मांग रही है, जिसे मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने एक-दो बार नहीं, बल्कि छह बार लिखित रूप में रखा है। चार बार प्रधानमंत्री के सामने और दो बार खुद किरेन रिजिजू के सामने।
3. क्या मोदी सरकार का इरादा उस हारे हुए बिल को वापस लाने और उसे दो-तिहाई बहुमत (जो कि पूरी तरह से विवादित है) के साथ पास कराने की एक और कोशिश करने का है, जो कि निश्चित रूप से फिर से विफल हो जाएगा?
✍️Avinay Mishra
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