राजधानी दिल्ली में इस बार सर्दी ने लोगों को सचमुच ठिठुरा दिया है। जनवरी 2026 को बीते तीन वर्षों की सबसे ठंडी जनवरी माना जा रहा है, जहां तापमान लगातार गिरता जा रहा है और ठंड के साथ-साथ कोहरे ने भी आम जनजीवन को खासा प्रभावित किया है।
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राजधानी दिल्ली में इस बार सर्दी ने लोगों को सचमुच ठिठुरा दिया है। जनवरी 2026 को बीते तीन वर्षों की सबसे ठंडी जनवरी माना जा रहा है, जहां तापमान लगातार गिरता जा रहा है और ठंड के साथ-साथ कोहरे ने भी आम जनजीवन को खासा प्रभावित किया है।
मौसम के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया है। कुछ जगहों पर पारा 3 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया, जो इस मौसम के लिहाज से असामान्य माना जा रहा है। यही वजह है कि यह जनवरी पिछले कुछ सालों की तुलना में ज्यादा कठोर साबित हो रही है।
कड़ाके की ठंड के साथ-साथ घना कोहरा भी दिल्ली-एनसीआर में परेशानी का कारण बना हुआ है।
सड़कों पर दृश्यता बेहद कम हो गई है,
ट्रेनों और उड़ानों पर असर पड़ा है,
और वायु गुणवत्ता भी खराब स्तर पर बनी हुई है।
यह स्थिति खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में लगातार कई दिनों से शीतलहर जैसी स्थिति बनी हुई है। ठंडी हवाओं और कम तापमान के चलते दिन में भी सर्दी का एहसास हो रहा है। हालांकि, आने वाले दिनों में मौसम के थोड़ा सामान्य होने की संभावना जताई जा रही है।
इस कड़ाके की सर्दी का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है।
स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या घटी है,
सुबह-सुबह सड़कों पर आवाजाही कम दिख रही है,
और अस्पतालों में सर्दी से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं।
इसके साथ ही, प्रदूषण और ठंड का मेल दिल्लीवासियों के लिए दोहरी चुनौती बन गया है।
हालांकि दिल्ली में सर्दियां कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन 2026 की जनवरी अपनी लगातार ठंड, घने कोहरे और गिरते तापमान के कारण अलग पहचान बना रही है। यह मौसम न सिर्फ रिकॉर्ड के लिहाज से अहम है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बदलते मौसम के पैटर्न का असर अब शहरों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ नजर आने लगा है।