उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।✍️अरविंद कुमार
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Dinesh Sharma : उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। छात्र राजनीति और संघ से जुड़े सफर से लेकर लखनऊ के महापौर, भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारी, यूपी के डिप्टी सीएम और राज्यसभा सदस्य तक का लंबा राजनीतिक सफर तय कर चुके दिनेश शर्मा की नई जिम्मेदारी को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति और ब्राह्मण समाज को लेकर दिए जा रहे संदेश से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसी बीच भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उनकी नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी। अंडमान-निकोबार देश के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में इस संवैधानिक जिम्मेदारी को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है।
12 जनवरी 1964 को लखनऊ में जन्मे दिनेश शर्मा ने लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और बाद में इसी विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर रहे। उनका राजनीति से जुड़ाव छात्र जीवन में ही हो गया था। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आए और यहीं से उनके संगठनात्मक सफर की शुरुआत हुई।
बाद में वह भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी सक्रिय रहे। उनके पिता केदार नाथ शर्मा भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ से जुड़े रहे थे। संगठन के साथ लंबे समय तक काम करने के बाद दिनेश शर्मा भाजपा में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हासिल करते गए।
दिनेश शर्मा के राजनीतिक करियर में बड़ा मोड़ वर्ष 2006 में आया, जब वह पहली बार लखनऊ के महापौर चुने गए। इसके बाद 2012 में उन्होंने लगातार दूसरी बार महापौर का चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। महापौर के तौर पर दो कार्यकाल पूरे करने के बाद प्रदेश भाजपा में उनका प्रभाव और बढ़ा और वह पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद दिनेश शर्मा को पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। अगस्त 2014 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके साथ ही उन्हें गुजरात भाजपा के प्रभारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। राष्ट्रीय संगठन में भूमिका निभाने के दौरान उन्होंने पार्टी के विस्तार और संगठनात्मक गतिविधियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में दिनेश शर्मा के करियर का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2017 में आया। विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी। 19 मार्च 2017 को दिनेश शर्मा ने केशव प्रसाद मौर्य के साथ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
उस समय वह विधानसभा के निर्वाचित सदस्य नहीं थे। बाद में सितंबर 2017 में वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बने। योगी सरकार के पहले कार्यकाल में उनके पास शिक्षा समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रही।
उत्तर प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल पूरा करने के बाद भाजपा ने वर्ष 2023 में दिनेश शर्मा को राज्यसभा भेजा। वह उच्च सदन में पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं में रहे और राज्यसभा के उपसभापति पैनल में भी शामिल रहे। अब उन्हें अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद उनके राजनीतिक सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
उत्तर प्रदेश में दिनेश शर्मा की पहचान भाजपा के प्रमुख ब्राह्मण नेताओं में रही है। यही वजह है कि उनकी नई नियुक्ति के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। इससे पहले भाजपा ने हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी थी। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज को लेकर भाजपा, सपा और बसपा की राजनीतिक सक्रियता लगातार चर्चा में है। बसपा अपने पुराने सामाजिक समीकरण को फिर मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं सपा भी ब्राह्मण मतदाताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
ऐसे में दिनेश शर्मा जैसे वरिष्ठ ब्राह्मण नेता को संवैधानिक पद की जिम्मेदारी दिए जाने को भाजपा की ओर से समाज को सम्मान और हिस्सेदारी का संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उपराज्यपाल की नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होती है, लेकिन 2027 के चुनावी माहौल में इसके राजनीतिक संदेश पर चर्चा स्वाभाविक है।
उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद दिनेश शर्मा ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा पार्टी का पूरा आशीर्वाद और सहयोग मिला है और उन्होंने हर जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाने का प्रयास किया है। उन्होंने अंडमान-निकोबार को भारत के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन पर जो भरोसा जताया है, वह उस विश्वास पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे।
डॉ. दिनेश शर्मा का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से शुरू होकर संघ और विद्यार्थी परिषद की गतिविधियों से आगे बढ़ा। भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद वह दो बार लखनऊ के महापौर बने, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात प्रभारी जैसे पद संभाले, फिर योगी सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे और 2023 में राज्यसभा पहुंचे।
अब अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति उनके लंबे सार्वजनिक जीवन की एक नई जिम्मेदारी है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनकी नियुक्ति को भाजपा की व्यापक राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
✍️अरविंद कुमार
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