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FCRA AMENDMENT BILL 2026 : विदेशी फंडिंग पर नया कानून…क्या बदलेगा? जानिए 1976 से 2026 तक पूरी कहानी

By HO BUREAU 

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FCRA AMENDMENT BILL 2026 : विदेशी फंडिंग पर नया कानून...क्या बदलेगा? जानिए 1976 से 2026 तक पूरी कहानी

नई दिल्ली : भारत में विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाला Foreign Contribution (Regulation) Act—FCRA अब एक नए महत्वपूर्ण चरण में है। Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। प्रस्तावित कानून में विदेशी अंशदान से बनाई गई संपत्तियों, FCRA certificate के समाप्त होने, NGO की जवाबदेही और Designated Authority की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं।

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यह केवल एक सामान्य regulatory amendment नहीं है। इसके पीछे विदेशी धन के उपयोग, राष्ट्रीय हित, financial transparency, organisational accountability और विदेशी-funded assets के भविष्य से जुड़े बड़े policy questions हैं।

हालांकि, यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि 2026 Bill के प्रस्तावित प्रावधानों को वर्तमान लागू कानून नहीं माना जा सकता, जब तक संसद की विधायी प्रक्रिया पूरी होकर संबंधित प्रावधान लागू न हो जाएं।

FCRA 1976: विदेशी फंडिंग नियंत्रण की शुरुआत

भारत में विदेशी अंशदान और विदेशी आतिथ्य को नियंत्रित करने की पहली व्यापक केंद्रीय वैधानिक व्यवस्था Foreign Contribution (Regulation) Act, 1976 से शुरू हुई।

इस कानून के पीछे मूल नीति-चिंता यह थी कि विदेशी धन या विदेशी प्रभाव के माध्यम से भारत की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक या अन्य गतिविधियों को इस प्रकार प्रभावित न किया जाए, जिससे राष्ट्रीय हित प्रभावित हो।

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समय के साथ foreign contribution प्राप्त करने वाले संगठनों की संख्या और गतिविधियों का विस्तार हुआ। इसके साथ registration, accounts, utilisation और reporting पर सरकारी निगरानी भी विकसित होती गई।

2010: आधुनिक FCRA REGULATORY FRAMEWORK

Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 ने 1976 के कानून को replace किया और विदेशी अंशदान तथा विदेशी आतिथ्य की acceptance और utilisation को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कानूनी framework स्थापित किया।

FCRA 2010 में registration, renewal, prior permission, utilisation, accounting, reporting, inspection, cancellation और penalties जैसी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित किया गया।

नया Act 1 मई 2011 से प्रभावी हुआ और इसके साथ FCRA registration, prior permission, accounts, utilisation तथा reporting की आधुनिक व्यवस्था लागू हुई।

FCRA registration के अलावा ऐसे organisations के लिए Prior Permission का मार्ग भी रखा गया जो बिना registration के किसी निर्धारित foreign source से निर्धारित राशि को निर्धारित उद्देश्य के लिए प्राप्त करना चाहते हैं।

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इस प्रकार FCRA का मूल उद्देश्य foreign funding पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि उसके source, recipient, purpose, utilisation और financial reporting को कानूनी निगरानी के दायरे में रखना रहा है।

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2016–2018: POLITICAL FUNDING और FOREIGN SOURCE का विवाद

FCRA के इतिहास में foreign source और political funding का प्रश्न भी महत्वपूर्ण रहा है। Finance Act, 2016 के माध्यम से “foreign source” की statutory definition में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। इसके बाद political parties और foreign contribution से संबंधित कानूनी प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण बने।

इसके बाद Finance Act, 2018 के माध्यम से foreign source की statutory definition में पुनः परिवर्तन किया गया और इस परिवर्तन को 26 सितंबर 1976 से retrospective effect दिया गया। इससे पुराने political contributions की कानूनी स्थिति को लेकर विवाद पैदा हुआ। इस घटनाक्रम ने यह प्रश्न भी सामने रखा कि foreign funding और लोकतांत्रिक political process के बीच regulatory balance कैसे कायम किया जाए।

2020: FCRA व्यवस्था में बड़ा वित्तीय बदलाव

Foreign Contribution (Regulation) Amendment Act, 2020 FCRA के post-2010 framework में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया।

संशोधन के बाद foreign contribution के transfer, administrative expenditure, banking arrangements और identification requirements को अधिक कठोर बनाया गया।

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Section 7: Foreign Contribution Transfer पर रोक

संशोधित Section 7 के तहत FCRA recipient द्वारा foreign contribution को किसी अन्य person या association को transfer करने पर रोक लगाई गई।

Section 8: Administrative Expenses

संशोधित Section 8 के तहत foreign contribution से administrative expenses की सामान्य सीमा 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दी गई।

Section 17: FCRA Bank Account

Foreign contribution की receipt के लिए SBI की नई दिल्ली स्थित designated branch में FCRA account की व्यवस्था की गई।

Section 12A: Identification

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Registration और prior permission से जुड़े applicants तथा office-bearers की identification requirements को मजबूत किया गया।

इन बदलावों का व्यापक उद्देश्य foreign contribution के source, recipient, utilisation और financial trail पर अधिक प्रभावी निगरानी और जवाबदेही स्थापित करना था।

सुप्रीम कोर्ट और FCRA: Noel Harper Judgment

FCRA की कानूनी यात्रा में Supreme Court का 2022 का Noel Harper v. Union of India निर्णय महत्वपूर्ण है।

Supreme Court ने 2020 FCRA amendments की constitutional validity को broadly uphold किया और foreign contribution को मौलिक अधिकार के बजाय एक regulated statutory activity के रूप में देखने की बात स्पष्ट की।

इसका व्यापक कानूनी अर्थ यह है कि foreign contribution प्राप्त करने के लिए Parliament द्वारा बनाए गए statutory conditions का पालन करना आवश्यक है।

आज सरकार की मुख्य चिंता क्या है?

FCRA का उद्देश्य भारत में विदेशी funding को समाप्त करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी अंशदान का प्राप्ति, उपयोग और अंतिम उद्देश्य कानून के अनुरूप, पारदर्शी और जवाबदेह रहे।

सरकार की प्रमुख regulatory चिंता यह सुनिश्चित करना है कि foreign contribution का उपयोग ऐसी गतिविधियों के लिए न हो जो:

इस दृष्टिकोण से FCRA का regulatory framework केवल यह देखने तक सीमित नहीं है कि विदेशी धन किस स्रोत से आया, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि वह किस संस्था को मिला, किस उद्देश्य के लिए प्राप्त हुआ, कहां खर्च किया गया और उसका वास्तविक उपयोग किस गतिविधि में हुआ।

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RS Legislative Research  के उपलब्ध Legislative Brief के अनुसार भी FCRA का एक प्रमुख उद्देश्य foreign contribution के diversion को ऐसी गतिविधियों की ओर रोकना है जो national interest के लिए detrimental हो सकती हैं।

अर्थात, सरकार की मूल नीति को इस रूप में समझा जा सकता है:

“Foreign funding की अनुमति, लेकिन foreign influence और foreign funds के misuse पर प्रभावी regulatory control।”

इसी regulatory philosophy को आगे बढ़ाते हुए 2026 में प्रस्तावित FCRA Amendment Bill में foreign-funded assets, certificate cessation और organisational accountability जैसे विषयों को भी अधिक स्पष्ट कानूनी ढांचे में लाने का प्रयास किया गया है।

POLITICAL THREAT: विदेशी धन और राजनीतिक प्रभाव

भारत जैसे लोकतंत्र में राजनीतिक निर्णय भारतीय संविधान, संसद और मतदाताओं की लोकतांत्रिक इच्छा के आधार पर होने चाहिए।

विदेशी धन यदि राजनीतिक influence या policy decision-making को अनुचित रूप से प्रभावित करने का माध्यम बनता है, तो यह national sovereignty और democratic integrity से जुड़ा concern बन सकता है।

इसीलिए FCRA framework में foreign contribution और political activity के बीच regulatory restrictions महत्वपूर्ण रहे हैं। हालांकि FCRA Amendment Bill 2026 को सीधे political-party funding Bill कहना सही नहीं होगा।

इस Bill का मुख्य focus है :

FCRA CERTIFICATE + FOREIGN-FUNDED ASSETS + ORGANISATIONAL ACCOUNTABILITY.

SOCIAL THREAT: विदेशी फंड और सामाजिक प्रभाव

भारत में विदेशी funding से healthcare, education, poverty alleviation, disaster relief और social welfare जैसे अनेक वैध कार्य होते हैं, लेकिन foreign funding के साथ transparency और accountability भी आवश्यक है। सरकार के regulatory दृष्टिकोण से प्रश्न यह है। विदेशी धन किस उद्देश्य से आया, किस संस्था को मिला, कहां खर्च हुआ और उससे क्या institutional assets तैयार हुए?

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2026 Bill इसी accountability को एक कदम आगे ले जाकर foreign-funded assets के future status को भी regulate करने का प्रस्ताव करता है, इसीलिए सरकार का regulatory approach है कि foreign funding का:

SOURCE RECIPIENT PURPOSE UTILISATION OUTCOME

स्पष्ट और traceable होना चाहिए।

ECONOMIC THREAT: FOREIGN-FUNDED ASSETS का प्रश्न

यहीं 2026 Bill का सबसे बड़ा policy बदलाव सामने आता है। यदि किसी organisation ने foreign contribution से hospital, school, research centre या कोई अन्य महत्वपूर्ण asset बनाई और बाद में उसका FCRA certificate समाप्त हो गया, तो उस asset का क्या होगा? Bill इसी स्थिति के लिए Designated Authority की व्यवस्था प्रस्तावित करता है।

Certificate cessation होने पर foreign contribution और उससे बनाई गई assets का provisional vesting हो सकता है। यदि organisation निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नया/renewed/restored certificate प्राप्त कर लेता है तो assets या unutilised contribution वापस किए जाने का प्रस्ताव है। अन्यथा vesting permanent हो सकती है।

RELIGIOUS THREAT: धार्मिक स्थलों के लिए क्या व्यवस्था?

यहां 2026 Bill का एक महत्वपूर्ण safeguard सामने आता है। यदि permanently vested asset पूरी तरह या आंशिक रूप से place of worship है, तो Designated Authority को उसके religious character को बनाए रखना होगा। इसलिए proposed law को केवल religious institutions पर नियंत्रण के रूप में देखना उचित नहीं होगा। Bill का stated mechanism regulatory control के साथ धार्मिक चरित्र को बनाए रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित करता है।

FCRA AMENDMENT BILL 2026 में DESIGNATED AUTHORITY

Bill का सबसे महत्वपूर्ण नया institutional mechanism Designated Authority है। यह Authority :

Sale/disposal से प्राप्त proceeds तथा unutilised foreign contribution को Consolidated Fund of India में credit करने का प्रस्ताव है।

NGO के लिए सबसे बड़ा बदलाव: CERTIFICATE खत्म हुआ तो ASSET का क्या होगा?

Bill के अनुसार FCRA certificate के cessation की स्थितियों में शामिल हैं:

  1. renewal application नहीं किया गया;
  2. renewal application deny हो गया;
  3. certificate expiry से पहले renew नहीं हुआ;
  4. certificate cancelled या surrendered हो गया।

इसका practical effect यह हो सकता है कि foreign contribution से बनाई गई assets केवल इसलिए regulatory action के दायरे में आ जाएं क्योंकि organisation का FCRA certificate continue नहीं रहा।

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₹10 लाख वाला नया COMPLIANCE प्रश्न

FCRA Amendment Rules, 2026 ने renewal के संदर्भ में “reasonable activity” को लेकर एक महत्वपूर्ण compliance criterion जोड़ा है। PRS के अनुसार, organisation को पिछले दो financial years में कम-से-कम ₹10 लाख foreign contribution utilise करने पर chosen field में reasonable activity करने वाला माना जा सकता है।

इसका practical implication यह हो सकता है कि कम foreign contribution प्राप्त करने वाली या कम expenditure वाली संस्थाओं के लिए renewal एक महत्वपूर्ण compliance challenge बन जाए।

PRS ने इसी बिंदु पर concern जताया है कि यदि organisation ₹10 लाख की threshold पूरा नहीं कर पाता, तो renewal और consequently assets की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

MIXED FUNDING: DOMESTIC + FOREIGN MONEY से बनी ASSET

Bill के अनुसार यदि कोई asset partly foreign contribution से बनी है, तो भी पूरी asset vesting के दायरे में आ सकती है। Organisation domestic funds से बनाए गए distinct या ascertainable हिस्से को वापस पाने के लिए application कर सकता है।

यह provision विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़े hospitals, schools और social infrastructure projects में domestic और foreign donations अक्सर एक साथ इस्तेमाल हो सकते हैं।

PRIOR PERMISSION और FCRA REGISTRATION में अंतर

यह भी 2026 Bill को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। एक organisation जिसके पास FCRA registration नहीं है, वह specific source और specific purpose के लिए prior permission के माध्यम से foreign contribution प्राप्त कर सकता है।

Bill इस route के तहत received contribution को prescribed period में receive और utilise करने की व्यवस्था प्रस्तावित करता है। PRS ने यह प्रश्न भी उठाया है कि FCRA registration से बनी assets और prior permission route से बनी assets को Bill अलग तरह से treat करता हुआ दिखाई दे सकता है।

KEY FUNCTIONARIES की जवाबदेही

Bill “key functionaries” की statutory responsibility को स्पष्ट करता है। इसमें परिस्थितियों के अनुसार, Director, Partner, Trustee, Karta, Office Bearer, Governing Body Member, Managing Committee Member, Controlling Authority और organisation के management के लिए जिम्मेदार व्यक्ति शामिल हो सकते हैं।

यदि organisation से offence होता है तो key functionary पर liability का presumption हो सकता है, लेकिन वह यह साबित कर सकता है कि offence उसकी जानकारी के बिना हुआ था या उसने due diligence की थी।

DEFUNCT NGO के मामले में भी जवाबदेही

यदि organisation cease to exist या defunct हो जाता है, तो last key functionaries को Central Government को इसकी जानकारी देने की statutory responsibility प्रस्तावित है। Failure की स्थिति में foreign contribution के permanent vesting का प्रावधान लागू हो सकता है।

क्या 2026 Bill केवल सख्त कानून है?

Bill में criminal penalty के संबंध में एक महत्वपूर्ण बदलाव उल्टा कठोरता कम करने वाला भी है। मौजूदा व्यवस्था में कुछ contraventions के लिए अधिकतम imprisonment पांच वर्ष तक हो सकती है। Bill इसे एक वर्ष करने का प्रस्ताव करता है। साथ ही investigation शुरू करने के लिए Central Government की prior approval का प्रस्ताव है, इसलिए Bill को केवल “NGO पर और सख्ती” के रूप में पेश करना अधूरा विश्लेषण होगा।

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GOVERNMENT के पक्ष में कानूनी तर्क

सरकार के दृष्टिकोण से Bill का सबसे मजबूत justification यह है कि Foreign contribution से बनाई गई महत्वपूर्ण assets को केवल organisation के FCRA status समाप्त होने के कारण regulatory vacuum में नहीं छोड़ा जा सकता। यदि foreign money से public-facing infrastructure बनाया गया है, तो उसकी:

SOURCE UTILISATION ASSET MANAGEMENT POST-CERTIFICATE STATUS

की पूरी chain accountable रहनी चाहिए। इसीलिए Designated Authority की व्यवस्था को Government-side policy perspective से asset accountability mechanism के रूप में देखा जा सकता है।

CONSTITUTIONAL SAFEGUARDS भी जरूरी

कानून के विशेषज्ञ दृष्टिकोण से Government की regulatory power के साथ procedural safeguards भी महत्वपूर्ण हैं। PRS ने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया है कि renewal denial के खिलाफ Act/Bill में specific appeal mechanism नहीं है और renewal deny करने से पहले reasonable opportunity of hearing का प्रावधान भी स्पष्ट नहीं है। यहां future litigation में प्रमुख प्रश्न हो सकते हैं:

Government-side implementation में यदि इन procedural safeguards को मजबूत किया जाता है तो national-security objective और constitutional fairness के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

FCRA का पूरा राजनीतिक-नीतिगत Timeline

1976 — शुरुआत

विदेशी contribution और foreign influence को regulate करने के लिए पहला FCRA framework।

2010 — Comprehensive Law

FCRA 2010 ने registration, prior permission और compliance framework को institutionalise किया।

2020 — Financial Control

Transfer restrictions, administrative expenditure और banking compliance को मजबूत किया गया।

22 जून 2026 — Rules

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FCRA Amendment Rules, 2026 ने renewal के लिए “reasonable activity” के संदर्भ में ₹10 लाख utilisation criterion जोड़ा।

25 मार्च 2026 — Bill in Lok Sabha

FCRA Amendment Bill 2026 लोकसभा में पेश हुआ।

15 जुलाई 2026 — Detailed Policy Analysis

PRS ने Bill के provisions और संभावित legal तथा practical implications का Legislative Brief जारी किया।

2026 — वर्तमान राजनीतिक बहस

अब debate केवल foreign contribution प्राप्त करने तक सीमित नहीं है। मुख्य प्रश्न है:

Foreign contribution से बनाई गई assets और organisation के FCRA framework से बाहर होने के बाद उनकी ownership, management और public accountability क्या होगी?

FCRA की लगभग पांच दशक की यात्रा को इस क्रम में समझा जा सकता है:

                                      FOREIGN INFLUENCE

 

                                    FOREIGN CONTRIBUTIO

 

                               REGISTRATION & PERMISSION

 

                                 FINANCIAL MONITORING

 

                               UTILISATION & REPORTING

 

                                FOREIGN-FUNDED ASSETS

 

                         INSTITUTIONAL ACCOUNTABILITY

यानी FCRA Amendment Bill 2026 का proposed approach foreign money की निगरानी से आगे बढ़कर foreign-funded institutional assets की accountability तक पहुंचता है।

निष्कर्ष

FCRA Amendment Bill 2026 भारत की foreign funding policy में एक महत्वपूर्ण प्रस्तावित बदलाव है। 1976 में जहां मुख्य चिंता विदेशी प्रभाव और foreign contribution को regulate करने की थी, वहीं 2010 में comprehensive registration और compliance framework आया। 2020 में financial monitoring और utilisation controls मजबूत हुए।

2026 में focus का एक नया केंद्र सामने आया है:

Foreign-funded assets और उनके post-FCRA status की जवाबदेही। सरकार की दृष्टि से यह राष्ट्रीय हित, financial transparency और foreign influence के संभावित misuse को रोकने की दिशा में आवश्यक कदम माना जा सकता है।

दूसरी ओर, कानूनी दृष्टि से renewal denial, hearing, appeal, proportionality और mixed-funded assets जैसे प्रश्नों का समाधान भी महत्वपूर्ण होगा। इसलिए FCRA Amendment Bill 2026 को केवल “NGO पर सख्ती” या केवल “foreign funding पर रोक” के रूप में देखना सही नहीं होगा।

इसका वास्तविक प्रश्न इससे बड़ा है:

भारत foreign contribution से होने वाले वैध सामाजिक कार्यों को जारी रखते हुए foreign money, foreign influence और foreign-funded assets की accountability किस प्रकार सुनिश्चित करता है?

Disclaimer

यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक बयानों, आधिकारिक अभिलेखों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के विश्लेषण पर आधारित है। लेख में जिन आरोपों या दावों का उल्लेख किया गया है, उनमें से कई की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे दावों को उसी संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है और उन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

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