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कानपुर में बाढ़ का असर, गांव के किनारे पहुंचा गंगा का पानी, नाव से स्कूल जा रहे बच्चे

Kanpur : पहाड़ी इलाकों में हो रही भारी बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही कानपुर के गंगा किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।✍️ कुशाग्र अवस्थी

By HO BUREAU 

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Kanpur : पहाड़ी इलाकों में हो रही भारी बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही कानपुर के गंगा किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कानपुर के दिवनिपुर गांव में गंगा का पानी अब गांव के किनारों तक पहुंच चुका है। खेतों में खड़ी फसलें पानी की चपेट में आ गई हैं, वहीं ग्रामीणों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। हालात ये हैं कि गांव के बच्चों को नाव के जरिए स्कूल जाना पड़ रहा है।

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पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर अब गंगा के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है। कानपुर के दिवनिपुर गांव में गंगा का पानी अब गांव की ओर बढ़ने लगा है। खेतों के आसपास पानी पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि खेतों में खड़ी फसलें बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी बढ़ने से उनकी फसलें खराब हो रही हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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बाढ़ का असर सिर्फ खेतों तक ही सीमित नहीं है। गांव के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होने लगी है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। गांव के बच्चे नाव के जरिए स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं।

इलाके में की जा रही निगरानी और पेट्रोलिंग

प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। लगातार इलाके में निगरानी और पेट्रोलिंग की जा रही है। साथ ही प्रशासन की तरफ से राहत किट और शेल्टर होम भी तैयार रखे गए हैं, ताकि अगर बाढ़ का पानी और बढ़ता है तो ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके वहीं ग्रामीण प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक गांव में प्रशासन की तरफ से कोई खास सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। उनका कहना है कि न तो लगातार पेट्रोलिंग हो रही है और न ही राहत से जुड़ी कोई व्यवस्था गांव तक पहुंची है। ग्रामीणों के मुताबिक, बाढ़ के पानी के साथ-साथ बिजली की समस्या ने भी उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव में पिछले दो दिनों से बिजली गुल है, जिससे ग्रामीणों को अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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✍️ कुशाग्र अवस्थी

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