Kupwara : जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में भारतीय सेना के सतर्क जवानों ने शनिवार को नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया।
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Kupwara : जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में भारतीय सेना के सतर्क जवानों ने शनिवार को नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। इस दौरान दो घुसपैठिए मारे गए। सेना के सूत्रों के अनुसार, शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे केरन सेक्टर के जुमागुंड इलाके में संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी। इसके बाद जवानों ने संदिग्धों को चुनौती दी, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई।
सेना के सूत्रों ने बताया, “इस अभियान में दो आतंकवादी मारे गए हैं। गोली लगने के बाद उन्होंने पाकिस्तानी सीमा की ओर वापस भागने की कोशिश की। उनके शव नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर पड़े हैं।” इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और घुसपैठिए तो छिपे नहीं हैं। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा लगभग 740 किलोमीटर लंबी है। यह घाटी के कुपवाड़ा, बांदीपोरा और बारामूला जिलों के अलावा जम्मू संभाग के राजौरी, पुंछ और आंशिक रूप से जम्मू जिले से होकर गुजरती है।
भारतीय सेना नियंत्रण रेखा की सुरक्षा के लिए कई स्तरों वाली घुसपैठ-रोधी व्यवस्था बनाए रखती है। इसमें लगभग 550 किलोमीटर लंबी बाड़ भी शामिल है, जिस पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली आवाजाही, तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखना है।
बता दें कि राजौरी, पुंछ, बारामूला और कुपवाड़ा जैसे नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों में सेना लगातार हाई अलर्ट पर रहती है। अधिकृत स्थानीय निवासियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए पुंछ जैसे स्थानों पर प्रवेश द्वारों पर डिजिटल आधार-आधारित सीमा पार प्रणाली भी लागू की गई है।नियंत्रण रेखा के अलावा जम्मू-कश्मीर में लगभग 200 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा भी है, जो जम्मू संभाग के जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों से होकर गुजरती है। इस सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (BSF) के पास है।
भारतीय सेना और BSF को सीमा पार से घुसपैठ, आतंकवादियों की आवाजाही, तस्करी और ड्रोन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए तैनात किया गया है। सीमा पार बैठे आतंकवादी संचालक हथियार, गोला-बारूद, नकदी और मादक पदार्थ गिराने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं। इन सामानों को आतंकवादी संगठनों के ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) उठाकर आतंकवादियों तक पहुंचाते हैं, ताकि उनका इस्तेमाल गैरकानूनी और आतंकी गतिविधियों में किया जा सके।
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