UP News : उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा से एक दिल दहला देने वाली और इंसानियत को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। एक डॉक्टर की कथित घोर लापरवाही के कारण 5 साल की मासूम बच्ची मानवी को अपनी जिंदगी भर के लिए विकलांग होना पड़ा है।
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जिस उम्र में बच्चों के हाथों में खिलौने और पैरों में दौड़ने की उमंग होती है, उस उम्र में यह मासूम एक पैर के सहारे जीने को मजबूर हो गई है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह पूरा मामला बीते दिसंबर महीने का है। बांदा जिले के कोतवाली नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत पडुई गांव के निवासी अनिल कुमार की 5 साल की मासूम बेटी मानवी ऊंचाई से अचानक गिर गई थी। हादसे में उसके बाएं पैर की हड्डी टूट गई। घबराए परिजन बड़ी उम्मीदों और विश्वास के साथ उसे इलाज के लिए बांदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। वहां तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विनीत कुमार ने बच्ची का इलाज शुरू किया।
परिजनों का सीधा आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टर ने अत्यधिक लापरवाही बरती और घाव की सही समय पर देखभाल नहीं की। लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि जख्म में संक्रमण इस कदर फैल गया कि स्थिति बेकाबू हो गई। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने अपनी नाकामी और गलती को छिपाने के लिए आनन-फानन में मासूम बच्ची का बायां पैर जांघ के पास से काटकर अलग कर दिया।
जांच में दोषी मिलने पर बर्खास्तगी
मासूम का पैर कटने के बाद पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जब परिजनों ने इस घोर लापरवाही का विरोध किया और न्याय की गुहार लगाई तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। कॉलेज की आंतरिक जांच समिति ने इस पूरी घटना को ‘इरैमेबल कॉम्प्लिकेशन’ यानी एक अचानक हुई चिकित्सीय जटिलता करार देकर लीपापोती करने का प्रयास किया। हालांकि, परिजनों ने हार नहीं मानी और तत्कालीन जिलाधिकारी के सामने लिखित शिकायत दर्ज कराई।
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जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी की टीम ने मामले की निष्पक्ष जांच की तो डॉक्टर विनीत सिंह को स्पष्ट रूप से दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी डॉक्टर को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सिस्टम के काले सच को पूरी तरह उजागर कर दिया।
दोषी डॉक्टर की बर्खास्तगी के विरोध में मेडिकल कॉलेज के अन्य डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने और काम ठप्प करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इस दबाव के आगे कॉलेज प्रशासन घुटने टेकने पर मजबूर हो गया और महज 3 दिनों के भीतर अपनी ही पुरानी लीपापोती वाली रिपोर्ट का हवाला देते हुए दोषी डॉक्टर का निष्कासन रद्द कर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात और सरकार पर हमला
लगातार अन्याय और तंत्र की संवेदनहीनता झेल रहे पीड़ित परिवार ने न्याय की उम्मीद में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील त्रिवेदी के नेतृत्व में पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। पीड़ित परिवार ने अखिलेश यादव को अपनी आपबीती सुनाई और मेडिकल कॉलेज के रवैये की पूरी जानकारी दी। सपा प्रमुख ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और न्याय दिलाने की लड़ाई में हर संभव मदद का भरोसा दिया।
इसके साथ ही, अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश के अस्पतालों के रवैये पर कटाक्ष किया और कहा, “पेट में दर्द होगा तो आपकी टांग काट दी जाएगी। आप अगर प्लास्टर बंधवाने जाओगे, कुछ दिनों बाद पता लगा जिस जगह आपने प्लास्टर बंधवाया है, वो जगह काटनी पड़ जाएगी। अभी एक बच्ची मिली बांदा से, टांग कट गई।”
अखिलेश यादव के इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तहलका मचा दिया है और सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
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न्याय की आस में फिर जिलाधिकारी के पास पहुंचा पीड़ित परिवार
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से आश्वासन और समर्थन मिलने के बाद पीड़ित परिवार के हौसले को एक बार फिर बल मिला है। न्याय की आस में मंगलवार को पीड़ित परिवार ने एक बार फिर बांदा के जिलाधिकारी कार्यालय का दरवाजा खटखटाया। परिजनों ने जिलाधिकारी को एक नया शिकायती पत्र सौंपा, जिसमें पूरी घटना का विवरण देते हुए बर्खास्तगी रद्द करने वाले अधिकारियों और दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित पिता अनिल कुमार का कहना है कि उनकी मासूम बेटी का पूरा भविष्य बर्बाद हो चुका है और जब तक दोषी डॉक्टर को सजा नहीं मिलती और उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक उनकी यह लड़ाई जारी रहेगी। अब देखना यह होगा कि जनआक्रोश और राजनीतिक दबाव के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कड़ा कदम उठाता है या फिर पीड़ित परिवार को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।
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