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Jharkhand : झारखंड का राजनीतिक पारा 50 के पार

झारखंड हाईकोर्ट में माइनिंग लीज, शेल कंपनियों में निवेश और मनरेगा घोटाले से जुड़े मामले में सुनवाई हुई। तीनों मामलों में से अब दो मामले सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। जबकि मनरेगा से जुड़े मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में ही होगी।

By इंडिया वॉइस 
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रांची, 19 मई। Mining Lease Case : झारखंड हाई कोर्ट में गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के माइनिंग लीज आवंटन और शेल कंपनी से जुड़े उनके करीबियों के मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई शुरू होते ही सरकार के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से समय मांगा। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है। जिसे ध्यान में रखते हुए उन्हें समय दिया जाए। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 4 दिन का समय दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 24 मई को होगी।

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सरकार याचिका का विरोध क्यों कर रही ?- कोर्ट

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ED की ओर से कोर्ट को सौंपे गए दस्तावेज देखकर ऐसा लगता है कि ये मामला काफ़ी महत्वपूर्ण है और जनहित से जुड़ा हुआ है। सरकार इस याचिका का विरोध क्यों कर रही है?। इससे पहले कोर्ट के आदेश पर खूंटी में मनरेगा घोटाले से संबंधित सभी 16 केसों को डॉक्यूमेंट कोर्ट में सौंपे गए। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से जानना चाहा कि एक चार्जशीटेड अधिकारी को एफिडेविट दायर करने के लिए कैसे अधिकृत किया जा सकता है?।

मनरेगा मामले में 16 FIR दर्ज- ED

वहीं सरकार ने कोर्ट से मांग की है कि ED की ओर से कोर्ट में दी गई जानकारी सरकार को भी दी जाए। इस पर ED के वकील तुषार मेहता ने कहा कि ये जानकारी सिर्फ कोर्ट के लिए है, सरकार के लिए नहीं। कोर्ट को ED के वकील तुषार मेहता ने बताया कि 2010 में 16 FIR हुईं थी। इसके बाद ED ने अपनी जांच में पाया कि करोड़ों रुपये पूजा सिंघल के पास हैं। उन्हें मिलने वाली रिश्वत की रकम सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों तक पहुंचती थी। रिश्वत के पैसों को शेल कंपनी के माध्यम से मनी लॉड्रिंग की जाती थी। जांच में कुछ लोगों ने ये कबूला है कि मनी लॉड्रिंग होती थी। एक व्यक्ति ने मनी लॉड्रिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली कंपनियों की लिस्ट दी है।

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तो उधर याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि इस मामले को CBI को क्यों दिया जाए?, जबकि इस मामले में किसी तरह की FIR दर्ज नहीं है। इस पर याचिकाकर्ता के वकील राजीव कुमार ने दलील देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर अदालत जांच का आदेश पारित कर सकती है। साथ ही उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि ये मामला पूजा सिंघल के मामले से जुड़ा है।

कोर्ट ने पूजा सिंघल मामले में सरकार से मांगा काउंटर एफिडेविट

IAS Pooja Singhal Case : तो वहीं दूसरी ओर झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को ही चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस एसएन प्रसाद की बेंच में IAS पूजा सिंघल के खिलाफ अरुण कुमार दुबे की हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने सरकार पक्ष से काउंटर एफिडेविट की मांग की। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 24 मई तय की गई है। हाईकोर्ट ने मनरेगा घोटाले से संबधित 16 FIR की मांग ED से की थी।

IAS पूजा सिंघल पर बड़े घोटाले का आरोप

गौरतलब है कि याचिका में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और एक सिंडिकेट स्थापित कर बड़े घोटालों को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है। हस्तक्षेप याचिका के जरिए बताया गया है कि IAS पूजा सिंघल ने 200 करोड़ से अधिक संपत्ति जुटाई है। इसकी जांच CBI से कराने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से एक FIR 2018 में दर्ज की गयी है। इस प्राथमिकी के आधार पर मनी लाउंड्रिंग मामले की जांच चल रही है। याचिकाकर्ता ने सिंडिकेट में शामिल 5 और IAS अधिकारी के खिलाफ भी ED और CBI जांच कराने की मांग की गई है।

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बतादें कि गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में माइनिंग लीज, शेल कंपनियों में निवेश और मनरेगा घोटाले से जुड़े मामले में सुनवाई हुई। तीनों मामलों में से अब दो मामले सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। जबकि मनरेगा से जुड़े मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में ही होगी।

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