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BSP के खिसकते जनाधार को बचाने की उम्मीद में उत्तराधिकारी तराशने में फिर जुटीं मायावती

By HO BUREAU 

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BSP के खिसकते जनाधार को बचाने की उम्मीद में उत्तराधिकारी तराशने में फिर जुटीं मायावती

Mayawati : चुनाव दर चुनाव लगातार बहुजन समाज पार्टी का जनाधार गिरता जा रहा है। बचे हुए में चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी तेजी से सेंध लगा रही है। ऊपर से मायावती की बढ़ती उम्र की चिंता ने उन्हें पार्टी के लिए उत्तराधिकारी तराशने के लिए मजबूर कर दिया है। भतीजे आकाश आनंद को तीन बार परखने बाद अब उनकी उम्मीद दूसरे भतीजे ईशान को लेकर बढ़ी है। मायावती के घर में उत्तराधिकार का पर्दा एक बार फिर उठा है और इस बार दृश्य बदला हुआ है।

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जिस आकाश आनंद को दिसंबर 2023 में उन्होंने अपने जीते जी उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया था, वही आकाश सितंबर 2026 की कार्यकारिणी में अपरिपक्व करार देकर राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटा दिए गए। उनकी जगह मंच पर दूसरे भतीजे ईशान आनंद दिखे, जिन्हें मुख्य सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह केवल एक व्यक्ति का हटना और दूसरे का आना नहीं है, यह बहुजन समाज पार्टी की उस पुरानी कार्यशैली की वापसी है जिसमें एक ही चेहरा होता है और बाकी सब उसकी परिक्रमा करते हैं।

आकाश आनंद की कहानी पिछले तीन साल में तीसरी बार दोहराई गई है। पहले उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया गया, राष्ट्रीय मंचों पर युवा चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया गया, फिर लोकसभा चुनाव के दौरान आक्रामक भाषणों के कारण एक झटके में सब कुछ वापस ले लिया गया। कुछ महीनों बाद फिर बहाली हुई, फिर जिम्मेदारी मिली और फिर मार्च 2025 में पार्टी से निकाले जाने तक की नौबत आई।

हर बार कारण लगभग वही रहे। मायावती को लगा कि आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आ रहे हैं, सोशल मीडिया पर स्वतंत्र छवि बना रहे हैं और भाजपा सरकार पर उस शैली में हमला कर रहे हैं जो बसपा की संतुलित और कानूनी दांव-पेच से बचने वाली राजनीति से मेल नहीं खाती। इस बार भी जब सोशल मीडिया पर उम्मीदों का आकाश ट्रेंड करने लगा तो मायावती ने पदाधिकारियों को अनफॉलो तक करने का निर्देश दे दिया।

GenZ को पार्टी से जोड़ने के लिए ईशान पर ज्यादा भरोसा

ईशान लंदन से कानून की डिग्री लेकर आए हैं, अब तक पिता आनंद कुमार के साथ व्यवसाय संभालते रहे हैं और राजनीति में उनका कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है। उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड छोड़कर बाकी राज्यों की समीक्षा का काम दिया गया है और रिपोर्ट सीधे मायावती और आनंद कुमार को देनी है। इसका अर्थ साफ है। ईशान को प्रचार का चेहरा नहीं बल्कि संगठन का निगरानी तंत्र बनाया जा रहा है। मायावती यह देखना चाहती हैं कि क्या बिना अपना जनाधार बनाए, बिना मीडिया में छाए कोई व्यक्ति बूथ स्तर की रिपोर्ट ईमानदारी से ला सकता है। यह प्रयोग GenZ को जोड़ने की भाषा में लपेटा जा रहा है, लेकिन असल में यह नियंत्रण का प्रयोग है।

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बसपा की वर्तमान स्थितियों के बीच ईशान एक उम्मीद

मायावती की रणनीति को समझने के लिए बसपा की मौजूदा स्थिति देखनी होगी। लोकसभा में शून्य सांसद, राज्यसभा में भी नवंबर में शून्यता की स्थिति हो जाएगी। यूपी विधानसभा के 2022 के चुनाव में एक विधायक सदन में थे। उनके निधन के बाद वो भी खाली हो गया है। विधान परिषद भी खाली है और लगातार चुनाव दर चुनाव वोट शेयर घटता जा रहा है।

ऐसे में मायावती ने 2027 का चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान किया है। वह गठबंधन से हुए नुकसान का हवाला दे रही हैं और फिर से 2007 वाले दलित ब्राह्मण मुस्लिम समीकरण को जिला स्तर की भाईचारा कमेटियों से जिंदा करना चाहती हैं। इस योजना में किसी बड़े उत्तराधिकारी की जरूरत नहीं बल्कि ऐसे कार्यकर्ताओं की जरूरत है जो पूरी तरह हाईकमान पर निर्भर हों। ईशान इसी कसौटी पर फिट बैठते हैं। उनके पास न अपना गुट है न अपना बयान। इसलिए बसपा की वर्तमान स्थितियों के बीच ईशान एक उम्मीद हैं क्योंकि आनंद को तीन बार आजमाया जा चुका है।

क्या ईशान हो सकते हैं बीएसपी के उत्तराधिकारी?

इन बदलती बिगड़ती परिस्थितियों में क्या ईशान को उत्तराधिकार मिल सकता है। इसका सीधा उत्तर है अभी नहीं। राजनीतिक गलियारों में इसे विकल्प खोजने की कवायद कहा जा रहा है न कि उत्तराधिकार तय करने की प्रक्रिया। मायावती ने खुद कह दिया है कि वह जीते जी किसी को उत्तराधिकारी घोषित नहीं करेंगी।

कांशीराम ने मायावती को बनाया था और मायावती जानती हैं कि एक बार उत्तराधिकारी घोषित होते ही संगठन में दो केंद्र बन जाते हैं। ईशान के लिए रास्ता तभी खुलेगा जब वह अगले डेढ़ साल में बिना विवाद के संगठन में परिणाम दिखाएंगे। अगर वह ऐसा कर पाए तो उन्हें युवा विंग के प्रमुख के तौर पर स्थापित किया जा सकता है, लेकिन बुआ की कुर्सी पर बैठना अभी दूर की कौड़ी है। फिलहाल संदेश यही है कि बसपा में बुआ ही पार्टी है और भतीजे केवल प्रशिक्षु हैं।

Anil Shahi

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इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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