Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. JHARKHAND
  3. रांची में बारिश के साथ बढ़ा लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा, 2 महीने में 130 से ज्यादा मरीज पहुंचे अस्पताल

रांची में बारिश के साथ बढ़ा लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा, 2 महीने में 130 से ज्यादा मरीज पहुंचे अस्पताल

By HO BUREAU 

Updated Date

रांची में बारिश के साथ बढ़ा लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा, 2 महीने में 130 से ज्यादा मरीज पहुंचे अस्पताल

रांची, झारखंड: रांची में बारिश के मौसम के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। राजधानी में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ी है। दूषित पानी और जलजमाव के बीच फैलने वाली इस बीमारी के पिछले दो महीनों में 130 से ज्यादा संदिग्ध/संक्रमित मरीज एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, लेप्टोस्पायरोसिस का संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और दूसरे जानवरों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलता है। बारिश के दिनों में जलजमाव के कारण इसका खतरा और बढ़ जाता है।

पढ़ें :- छात्र विधानसभा के करीब पहुंचे, पुलिस ने वाटर कैनन का किया इस्तेमाल, प्रदर्शनकारियों ने किया रेन डांस

चूहे का पेशाब और दूषित पानी खतरे की वजह

लेप्टोस्पायरोसिस एक जूनोटिक बीमारी है। संक्रमित चूहे, कुत्ते, मवेशी और सूअर जैसे जानवरों का मूत्र जब पानी या मिट्टी को दूषित करता है, तो उसके संपर्क में आने वाले इंसानों में संक्रमण फैल सकता है। खासकर जलजमाव वाले इलाकों में नंगे पैर चलना, लंबे समय तक गंदे पानी में रहना या शरीर पर कटे-घाव होना संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है।

वायरल फीवर समझकर गलती न करें

इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे नजर आ सकते हैं। अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में तेज दर्द, कमजोरी, उल्टी और आंखों में लालिमा इसके प्रमुख शुरुआती लक्षण हैं। रांची सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश कुमार सिंह के अनुसार, बुखार के साथ अगर शरीर में तेज दर्द हो रहा है तो इसे सामान्य वायरल फीवर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

जलजमाव में नंगे पैर जाना पड़ सकता है भारी

बारिश के दौरान जमा पानी में संक्रमित जानवरों का मूत्र मिल सकता है। ऐसे पानी के संपर्क में आने पर बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसलिए जलजमाव वाले इलाकों में जाने से बचना जरूरी है। अगर जाना मजबूरी हो तो रबर के जूते और दस्ताने पहनना बेहतर है।

शरीर पर घाव है तो बरतें ज्यादा सावधानी
शरीर पर कट या घाव होने की स्थिति में दूषित पानी के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए घाव को खुला न छोड़ें और उसे साफ पट्टी से ढंककर रखें। दूषित पानी के संपर्क में आने के बाद शरीर को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना भी जरूरी है।

पढ़ें :- 14वीं जेपीएससी पीटी रद्द, सरकार ने मान लीं कई मांगें, CGL एग्जाम कैंसिल नहीं

लापरवाही से किडनी और लिवर पर असर
लेप्टोस्पायरोसिस को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। संक्रमण गंभीर होने पर इसका असर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, खासकर किडनी और लिवर, पर पड़ सकता है। गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए बारिश के बाद तेज बुखार और बदन में असामान्य दर्द जैसे लक्षण दिखने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

कैसे बचें? तीन बातें याद रखें
• जलजमाव से बचें: जरूरत न हो तो गंदे और जमा पानी में न जाएं।
• घाव ढंककर रखें: कट या चोट को दूषित पानी के सीधे संपर्क में न आने दें।
• सफाई रखें: पानी के संपर्क में आने के बाद साबुन से शरीर धोएं और घर के आसपास चूहों की मौजूदगी रोकने के उपाय करें।

विश्वजीत भट्ट

Disclaimer

इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें।

Advertisement