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बिसरख के लोग रावण को बेटा मानते हैं इसलिए नहीं करते दहन

नोएडा से करीब 15 किमी दूर बिसरख गांव है. इस गांव के रावण का दहन नहीं करते बल्कि उसे गांव का बेटा मानते है. मान्यता है कि रावण का जन्म इसी गांव में हुआ था. यहीं रावण का मंदिर है.

By इंडिया वॉइस 

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नोएडा से करीब 15 किमी दूर बिसरख गांव है। इस गांव के रावण का दहन नहीं करते बल्कि उसे गांव का बेटा मानते है.मान्यता है कि रावण का जन्म इसी गांव में हुआ था. यहीं रावण का मंदिर है और उनके पिता ने शिवलिंग की स्थापना की थी.गांव में रामलीला नहीं होती रावण दहन नहीं होता. बल्कि रावण की पूजा होती है. दशहरा पर यहां शस्त्रों की पूजा की जाएगी.

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क्या है बिसरख का इतिहास

रावण के पिता विश्रव ब्राह्मण थे. उन्होंने राक्षसी राजकुमारी कैकसी से शादी की थी. रावण के अलावा कुंभकरण, सूर्पनखा और विभीषण का जन्म भी इसी गांव में हुआ. यहां दो बार रावण दहन किया गया, लेकिन दोनों ही बार रामलीला के दौरान किसी न किसी की मौत हो गई थी, यहां रावण की आत्मा की शांति के लिए यज्ञ-हवन किए जाते हैं. साथ ही नवरात्रि के दौरान शिवलिंग पर बलि चढ़ाई जाती है.

शिवपुराण में मिलता है बिसरख गांव का जिक्र

महाराज अशोका नंद ने बताया कि बिसरख गांव का जिक्र शिवपुराण में भी किया गया है. कहा जाता है कि त्रेता युग में इस गांव में ऋषि विश्रव का जन्म हुआ था. उन्होंने यहां अष्टभुजी शिवलिंग की स्थापना की. यह पौराणिक काल की शिवलिंग बाहर से देखने में महज 2.5 फीट की है, लेकिन जमीन के नीचे इसकी लंबाई लगभग 8 फीट है. इस गांव में अब तक 25 शिवलिंग मिले हैं, जिनमें से एक की गहराई इतनी है कि खुदाई के बाद भी उसका कहीं छोर नहीं मिला है.

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अष्ठभुजी शिवलिंग एवं श्री मोहन मंदिर योगाश्रम के अध्यक्ष अशोकानन्द महाराज का कहना है कि बिसरख रावण के पिता विश्रवा ऋषि का गांव था. उन्हीं के नाम पर गांव का नाम बिसरख पड़ा. वह यहां पर पूजा अर्चना करते थे. रावण का भी जन्म यहीं हुआ था.

700 किलो की मूर्ति होगी स्थापित

रावण धाम में 2016 में रावण की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया था. इसके बाद यहां पर रावण की प्रतिमा को स्थापित नहीं किया गया है. महाराज अशोकानंद ने बताया कि 2023 को विजयदशमी के अवसर पर 7 फीट लंबी और 700 किलो की रावण की प्रतिमा की स्थापना मंदिर में की जाएगी. इसके अलावा रावण के पिता- माता पुत्र मेघनाद, भाई कुंभकरण की मूर्ति की स्थापना की जाएगी.

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