भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के लगाए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और ये इस्लामाबाद की अपनी विफलताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं। पीओके में चल रहा विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की दशकों पुरानी दमनकारी नीतियों का परिणाम है।
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भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को पाकिस्तान के उन “झूठे दावों” को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें पाकिस्तान ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी अशांति के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के लगाए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और ये इस्लामाबाद की अपनी विफलताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं।
रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम पाकिस्तान के इन झूठे और मनगढ़ंत आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं। ये बयान पाकिस्तान की विफलताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं।” प्रवक्ता ने कहा कि पीओके में चल रहा विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की दशकों पुरानी दमनकारी नीतियों का परिणाम है, जिसमें आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित रखना और प्रशासनिक दमन शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान ने हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस कार्रवाई, आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति पर रोक, इंटरनेट बंदी और नागरिकों पर बल प्रयोग किया है, जिसके चलते कई लोगों की मौत भी हुई है।
विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह इस स्थिति पर ध्यान दे और पाकिस्तान को उसके मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराए। रणधीर जायसवाल ने पहले भी 9 जून को कहा था कि पाकिस्तान फर्जी खबरों और वीडियो के जरिए अपनी कमियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पीओके के रावलाकोट क्षेत्र में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबर है। यह तनाव उस समय बढ़ा जब पाकिस्तानी प्रशासन ने संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और प्रवासी कश्मीरी समुदाय ने भी इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए नागरिकों पर कथित अत्याचारों की निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की है।
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