Delhi : दिल्ली में CAG रिपोर्ट को लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने-सामने हैं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने पिछली अरविंद केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में...
Updated Date
Delhi : दिल्ली में CAG रिपोर्ट को लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने-सामने हैं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने पिछली अरविंद केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में करीब 15 हजार करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का दावा किया है। GST बकाया, ई-वे बिल, बिजली सब्सिडी, टेंडर प्रक्रिया, दिल्ली जल बोर्ड की JE भर्ती और LNJP अस्पताल की लागत को लेकर उन्होंने कई सवाल उठाए। हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर यह स्पष्ट है कि CAG की आपत्तियां और उनके आधार पर लगाए गए राजनीतिक आरोप अलग-अलग विषय हैं।
दिल्ली की सियासत में CAG रिपोर्ट के बाद एक बार फिर पुरानी सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े हो गए हैं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने बीजेपी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि विधानसभा में पेश की गई 24वीं CAG रिपोर्ट समेत अब तक सामने आई रिपोर्टों में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं दर्ज हैं। उन्होंने इन रिपोर्टों को पिछली सरकार के कथित भ्रष्टाचार का ‘लिखित दस्तावेज’ बताया।
प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि दिल्ली सरकार पर 70,410 करोड़ रुपये का GST बकाया था, जिसमें 65 फीसदी से ज्यादा रकम पांच साल से अधिक समय से लंबित थी। उन्होंने यह भी कहा कि GST रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुके 8,334 टैक्सपेयर्स के जरिए 68,680 करोड़ रुपये के ई-वे बिल जारी किए गए। वहीं, 4,076 नॉन-टैक्सपेयर फाइल्स से करीब 11,635 करोड़ रुपये के ई-वे बिल बनाए जाने का दावा भी किया गया।
यह भी पढ़ें : “भारत को विश्वगुरु बनाना है तो…”, मोहन भागवत का बयान
मंत्री प्रवेश वर्मा के मुताबिक करीब 6.10 करोड़ ई-वे बिल जारी हुए, लेकिन केवल 0.1 फीसदी मामलों में कार्रवाई हुई। करीब 70 मामलों की जांच में 3,071 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का अनुमान लगाए जाने का दावा किया गया। बिजली सब्सिडी को लेकर भी उन्होंने ऐसे उपभोक्ताओं का जिक्र किया, जिनकी लंबे समय तक खपत शून्य रही, फिर भी सब्सिडी मिलने का दावा किया गया।
प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि ऑनलाइन ई-प्रोक्योरमेंट व्यवस्था के बावजूद 1,185 मैनुअल टेंडर किए गए। कुछ मामलों में विभाग और ठेकेदारों से जुड़े IP एड्रेस समान पाए जाने का दावा करते हुए उन्होंने संभावित मिलीभगत की जांच की मांग की। दिल्ली जल बोर्ड की JE भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और चुनाव से पहले परीक्षा कराने तथा बाद में पद के अस्तित्व पर सवाल खड़े होने का दावा किया।
LNJP अस्पताल की निर्माण लागत को लेकर भी प्रवेश वर्मा ने तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि प्रति बेड लागत करीब 33 लाख से बढ़कर 72 लाख रुपये तक पहुंच गई। कुल मिलाकर प्रवेश वर्मा ने अब तक सामने आई 24 CAG रिपोर्टों के आधार पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का दावा किया और जांच के बाद जिम्मेदारी तय करने की बात कही।
बहरहाल दिल्ली में CAG रिपोर्ट को लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में GST, ई-वे बिल, बिजली सब्सिडी, टेंडर प्रक्रिया, JE भर्ती और LNJP अस्पताल की लागत को लेकर पिछली सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उनका दावा है कि अलग-अलग CAG रिपोर्टों में सामने आई अनियमितताओं को जोड़ने पर आंकड़ा करीब 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचता है। हालांकि, इन दावों को फिलहाल राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। CAG की रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों और उनसे जुड़े राजनीतिक निष्कर्षों के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। अब सरकार की ओर से प्रस्तावित जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों की वास्तविक वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी बनती है।
Disclaimer
यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक बयानों, आधिकारिक अभिलेखों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के विश्लेषण पर आधारित है। लेख में जिन आरोपों या दावों का उल्लेख किया गया है, उनमें से कई की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे दावों को उसी संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है और उन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
✍️Arvind Kumar
देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें।